
नई दिल्ली, 05 फ़रवरी (हि.स.)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री के राज्य सभा में भाषण के दौरान विपक्ष के वॉकआउट को उचित बताया।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने न तो लोकसभा में और न ही राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं को बोलने दिया, जबकि विपक्ष राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखना चाहता था। सरकार विपक्ष की आवाज दबा रही है, किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका के साथ हुए समझौते पर जवाब देने से बच रही है और बेरोजगारी, महंगाई तथा सामाजिक न्याय जैसे सवालों पर चर्चा से भी कतराती है।
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में खरगे ने कहा कि चार दिनों से लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया, जबकि विपक्ष लोकतंत्र के हित में अपनी बात रखना चाहता था। विपक्षी दलों ने तय किया था कि यदि विपक्ष के नेता को बोलने दिया जाएगा तो सभी दल चर्चा में हिस्सा लेंगे, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया।
खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री से भी विपक्ष ने आग्रह किया था कि उन्हें दो मिनट बोलने का अवसर दिया जाए, जिससे स्थिति सामान्य हो सकती थी, लेकिन सरकार की मंशा विपक्ष को चुप कराने की थी। विपक्ष ने न तो हंगामा किया और न ही प्रधानमंत्री को बाधित किया, फिर भी उन्हें बोलने नहीं दिया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार उन नेताओं का अपमान सहन कर रही है, जो स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले पूर्व प्रधानमंत्रियों और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं। जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं ने आधुनिक भारत की नींव रखी, लेकिन सदन में उनके बारे में अपमानजनक टिप्पणियों पर सरकार चुप रहती है।
खरगे ने कहा कि विपक्ष ने एकजुट होकर निर्णय लिया कि जब उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है और उनके नेताओं का अपमान किया जा रहा है, तो वॉकआउट कर विरोध दर्ज कराना ही उचित होगा। विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा और जनता के मुद्दों को उठाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन सरकार चर्चा से बच रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर