
नई दिल्ली, 05 फ़रवरी (हि.स.)। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने गुरुवार को दूरसंचार (प्रसारण और केबल) सेवाएं अंतर्संबंध (पता योग्य प्रणालियां) (सातवां संशोधन) नियम, 2026 जारी किए। इन नियमों का उद्देश्य ऑडिट प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सरल बनाना है।
संचार मंत्रालय के मुताबिक अब हर वितरक (डिस्ट्रिब्यूटर) को हर साल 30 सितंबर तक ऑडिट रिपोर्ट प्रसारक को सौंपनी होगी। पहले यह प्रक्रिया कैलेंडर वर्ष पर आधारित थी, लेकिन अब इसे वित्तीय वर्ष के आधार पर किया जाएगा। यानी ऑडिट अप्रैल से मार्च तक की अवधि के हिसाब से होगा।
नए नियमों में प्रसारकों को भी ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। वह चाहें तो ऑडिट के दौरान अपने प्रतिनिधि भेज सकते हैं ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे। अगर रिपोर्ट में कोई कमी या गड़बड़ी मिलती है तो प्रसारक ऑडिटर से जवाब मांग सकते हैं। अगर जवाब संतोषजनक न हो तो वे ट्राई की अनुमति लेकर अपने खर्च पर अलग से ऑडिट करा सकते हैं।
ट्राई ने बताया कि इन नियमों में छोटे वितरकों को राहत दी गई है। छोटे वितरकों के 20 हजार से कम ग्राहक हैं, उनके लिए हर साल ऑडिट करना अनिवार्य नहीं होगा।हालांकि, अगर प्रसारक चाहें तो ऐसे वितरकों का ऑडिट अपने खर्च पर करा सकते हैं।
अवसंरचना साझारकरण से जुड़े नियम के तहत अब अलग-अलग कंपनियों के लिए अलग सिस्टम इंस्टेंस बनाने होंगे ताकि डेटा का सही मिलान हो सके। इसके अलावा पे चैनलों पर नेटवर्क लोगो वॉटरमार्किंग अनिवार्य होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता को चैनल पर लोगो लगाना होगा और सेवा लेने वाली कंपनी को भी अपने नेटवर्क का लोगो दिखाना होगा लेकिन दर्शकों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए स्क्रीन पर अधिकतम दो लोगो ही दिखेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर