मप्रः स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के परलोक गमन पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यक्त किया दु:ख

युगवार्ता    07-Feb-2026
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स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज (फाइल फोटो)


भोपाल, 07 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश- मध्य प्रदेश की सीमा पर सतना जिले में स्थित देश में प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम के संस्थापक महंत स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज शनिवार को ब्रह्मलीन हो गए। उन्होंने 102 वर्ष की आयु में मुंबई में अंतिम सांस ली। स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के ब्रह्मलीन होने की खबर मिलते ही देशभर में फैले लाखों श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परम पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के परलोक गमन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का सम्पूर्ण जीवन सेवा, साधना और मानवता के कल्याण को समर्पित रहा। मुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल अनुयायियों को यह अपार दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना की है।

धारकुंडी आश्रम के प्रमुख संत एवं शिष्य स्वामी संजय बाबा ने बताया कि स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज पिछले कुछ महीनों से मुंबई स्थित आश्रम में प्रवास कर रहे थे। एक जनवरी को उन्होंने चित्रकूट के धारकुंडी आश्रम में भक्तों के बीच अपना 102वां जन्मदिवस मनाया था। इसके बाद स्वास्थ्य खराब होने पर वे इलाज के लिए मुंबई गए थे। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वे बदलापुर स्थित आश्रम में ठहरे हुए थे, जहां शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

उन्होंने बताया कि मुंबई से उनका पार्थिव शरीर शनिवार देर रात चित्रकूट स्थित धारकुंडी आश्रम लाया गया, जहां श्रद्धालुओं ने नम आंखों से अपने आराध्य को श्रद्धांजलि अर्पित की। रविवार को आश्रम परिसर में अंतिम दर्शन कराए जाएंगे, जबकि सोमवार को आश्रम की परंपरा के अनुसार समाधि दी जाएगी।

स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन और समाधि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्वामी अड़गड़ानंद महाराज विशेष विमान से धारकुंडी पहुंच चुके हैं। चित्रकूट सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साधु, संत और महंत भी आश्रम पहुंच रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यूपी–एमपी सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। चित्रकूट प्रभारी एसपी सत्यपाल सिंह और सतना एसपी हंसराज सिंह स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।

1956 में हुई थी आश्रम की स्थापनास्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी परमानंद के आशीर्वाद से 22 नवंबर 1956 को धारकुंडी आश्रम की स्थापना की थी। उस समय यह क्षेत्र बेहद पिछड़ा माना जाता था और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। कहा जाता है कि स्वामी जी ने आश्रम परिसर में बहने वाली स्वच्छ और निरंतर जलधाराओं से बिजली उत्पादन की व्यवस्था शुरू कराई थी। आश्रम में स्थित दो झरनों का पानी वर्ष भर लगातार बहता रहता है, जो आगे चलकर नदी का रूप ले लेता है। मान्यता है कि स्थापना काल से लेकर वर्ष 1970 तक कई बार शेर भी आश्रम परिसर में आते-जाते थे और स्वामी जी के सान्निध्य में रहते थे। इससे जुड़ी अनेक कथाएं आज भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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