मुख्यमंत्री डॉ यादव ने धारकुंडी आश्रम में स्वामी सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन कर दी श्रद्धांजलि

युगवार्ता    08-Feb-2026
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धारकुंडी आश्रम में स्वामी सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन कर दी श्रद्धांजलि


- सोमवार को आश्रम परिसर में विधि-विधान से होगी समाधि

भोपाल, 08 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की सीमा पर मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित धारकुंडी आश्रम के संस्थापक परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज के ब्रह्मलीन होने के बाद उनकी पार्थिव देह सड़क मार्ग से रविवार को आश्रम लाई गई, जहां अंतिम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं और अनुयायियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी रविवार शाम को सतना जिले के धारकुण्डी आश्रम पहुंचकर परमपूज्य संत शिरोमणि स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन किए और उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामी जी का तप, त्याग और आध्यात्मिक मार्गदर्शन सदैव हमारी स्मृतियों में जीवित रहेगा और हम सबको लोकल्याण की प्रेरणा देता रहेगा।स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने शनिवार को 102 वर्ष की आयु में मुम्बई में अंतिम सांस ली थी। उनके परलोक गमन से रविवार को पूरे क्षेत्र में गम और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। जैसे ही गुरुदेव के पार्थिव शरीर के दर्शन श्रद्धालुओं को हुए, आश्रम परिसर जयघोष और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। उनके अंतिम दर्शन के लिए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, सांसद गणेश सिंह, चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार नगर निगम परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुधीर सिंह तोमर और संजय पटारिया सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक आश्रम पहुंचे और श्रद्धासुमन अर्पित किए। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। रीवा रेंज से करीब 500 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। संभागीय आयुक्त बीएस जामोद, आईजी गौरव राजपूत, कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस और एसपी हंसराज सिंह सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे। भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए आश्रम से लगभग पांच किलोमीटर पहले ही पार्किंग स्थल बनाया गया था, जहां से श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से आश्रम तक पहुंचाया गया। हजारों की संख्या में पहुंचे अनुयायियों ने कतारबद्ध होकर अंतिम दर्शन किए। पूरे मार्ग में सेवा शिविर की भी व्यवस्था की गई थी।

गेरुआ वस्त्र पहनाकर विराजित कियाश्रद्धालुओं के दर्शन के लिए परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज की पार्थिव देह को गेरुआ वस्त्र धारण कर गद्दी पर ध्यान की मुद्रा में विराजित किया गया था। यह दृश्य भक्तों के लिए अत्यंत भावुक क्षण लेकर आया, जहां अनेक अनुयायी अश्रुपूरित नेत्रों से अपने गुरु को अंतिम प्रणाम करते नजर आए।

सोमवार को आश्रम परिसर में होगी समाधिआश्रम प्रबंधन के अनुसार परमहंस स्वामी जी की समाधि सोमवार को आश्रम परिसर में निर्मित दिव्य स्थल पर दी जाएगी। समाधि की वैदिक प्रक्रिया के संबंध में मिर्जापुर के शक्तेशगढ़ से पधारे परमहंस अड़गड़ानंद स्वामी ने कलेक्टर और एसपी को विस्तार से जानकारी दी। सनातन परंपरा के अनुसार विधि-विधान से समाधि कार्यक्रम संपन्न कराया जाएगा। आश्रम के अन्य संत, श्री श्री 1008 रामायण महाराज, वीरेन्द्र कुमार महाराज और विजय महाराज भी उपस्थित हैं।

22 वर्ष की उम्र में धारण किया था वैराग्यपरमहंस सच्चिदानंद महाराज ने मात्र 22 वर्ष की आयु में वैराग्य धारण किया और अपना पूरा जीवन मानव कल्याण तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने 'मानस बोध' और 'गीता बोध' जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। इसके अलावा, आश्रम द्वारा उनके प्रवचनों और सारसंग्रह पर आधारित कई पुस्तकें प्रकाशित की गईं, जिनसे जिज्ञासु और साधक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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