आसनसोल कुमारपुर स्थित ओवर ब्रिज का रेल मंत्री ने किया वर्चुअल उद्घाटन

08 Feb 2026 21:42:53
मौके पर उपस्थित अतिथि


आसनसोल, 08 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार वर्चुअल तरीके से आसनसोल के कुमारपुर में रेलवे ओवरब्रिज का आधिकारिक रूप से उद्घाटन किया। मौके पर कुल्टी विधायक डॉक्टर अजय पोद्दार, आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पाल, भाजपा जिलाध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।

इस मौके पर भाजपा विधायक अग्निमित्रा पाल ने कहा कि केंद्र की दो संस्थाएं रेल और सेल द्वारा कुमारपुर ब्रिज का निर्माण किया गया था। जिससे कि बराचक रेलवे लाइन पर ट्रेनों के आवागमन की वजह से जाम लगता था। यह सच्चाई है कि रेलवे ओवरब्रिज का काम तत्कालीन भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो के कार्यकाल में हुआ था। लेकिन वह तृणमूल में चले गए।

भाजपा विधायक ने कहा कि बाबुल सुप्रियो ने जो किया वह भाजपा के साथ विश्वासघात था। अग्निमित्रा पाल ने कहा कि राज्य सरकार हमेशा केंद्र के विकास कार्यों में अड़चन पैदा करती रही है और कुमारपुर ब्रिज को लेकर भी उन्होंने अड़चनें पैदा कीं। जब भाजपा विधायक से पूछा गया कि रेलवे ओवरब्रिज एक साल पहले ही बनकर तैयार हो गया था।

चुनाव से पहले उसका उद्घाटन क्या सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन के असहयोग की वजह से काफी काम बाकी था। कुछ महीना पहले ही काम पूरा हुआ। इस वजह से इसका आधिकारिक रूप से अब उद्घाटन हुआ। उन्होंने कहा कि भाजपा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी कोई काम चुनावी फायदे के लिए नहीं करते। वह सिर्फ और सिर्फ जनता के लिए विकास पर ध्यान देते हैं। इस रेलवे ओवरब्रिज की आवश्यकता थी। इसलिए इसे बनवाया गया और अब इसका आधिकारिक रूप से उद्घाटन हुआ।

इसके साथ ही उन्होंने एक और मुद्दे की तरफ सभी का ध्यान आकर्षित किया कि इस कार्यक्रम के लिए जो निमंत्रण पत्र बनाया गया था। अग्निमित्रा पाल ने कहा कि इस कार्यक्रम के लिए जो निमंत्रण पत्र बनाया गया है। उसमें कहीं पर भी भाजपा के किसी भी जनप्रतिनिधि का नाम नहीं है। निमंत्रण पत्र में आसनसोल उत्तर के विधायक मलय घटक, आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, तृणमूल सांसद शताब्दी चटर्जी के नाम है। यहां पर किसी भी भाजपा नेता मंत्री या सांसद विधायक का नाम नहीं है क्योंकि भाजपा प्रोटोकॉल मानकर काम करती है। यही तो तृणमूल और भाजपा में फर्क है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

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