बैंकॉक, 08 फरवरी (हि.स.)। थाईलैंड के आम चुनाव में प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल की भूमिका वाली भूमजाइथाई पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। शुरुआती नतीजों के मुताबिक पार्टी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों पर अच्छी बढ़त बना ली है, जिससे देश में लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता के बाद अपेक्षाकृत स्थिर सरकार बनने की संभावना बढ़ गई है।
चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों में 90% से अधिक मतदान केंद्रों की गिनती के बाद भूमजाइथाई पार्टी आगे रही, जबकि दूसरे स्थान पर प्रगतिशील पीपुल्स पार्टी और उसके बाद फेउ थाई पार्टी का नंबर रहा। हालांकि भूमजाइथाई को पूर्ण बहुमत मिलना मुश्किल माना जा रहा है, लेकिन वह सरकार गठन और नीतिगत फैसलों में मजबूत स्थिति में दिख रही है।
अनुतिन ने परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “सभी थाई नागरिकों की जीत” बताया और कहा कि उनकी प्राथमिकता लोगों की सेवा और प्रशासनिक स्थिरता होगी। उन्होंने संसद भंग करने के अपने फैसले को दलों के बीच खींचतान और अल्पमत सरकार की मजबूरियों से जोड़ा था।
विश्लेषकों के अनुसार राष्ट्रवाद पर जोर, ग्रामीण इलाकों में संगठन की पकड़ और प्रतिद्वंद्वी दलों के नेताओं को साथ लाने की रणनीति भूमजाइथाई की सफलता के प्रमुख कारण रहे। पार्टी ने उपभोक्ता सब्सिडी जैसे लोकलुभावन वादे और कंबोडिया के साथ समुद्री दावों से जुड़े समझौते पर पुनर्विचार का संकेत भी दिया है।
पीपुल्स पार्टी ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि वह नई सरकार में शामिल नहीं होगी और विपक्ष की भूमिका निभाएगी।
इसी चुनाव के साथ मतदाताओं ने 2017 के सैन्य समर्थित संविधान की जगह नया संविधान लाने पर जनमत संग्रह में भी भाग लिया। शुरुआती रुझानों में नए संविधान के पक्ष में करीब दो-तिहाई समर्थन दिखा है। यदि प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो संसद और जनमत संग्रह के जरिए संवैधानिक संशोधन का रास्ता खुलेगा।
थाईलैंड में 1932 के बाद से कई बार संवैधानिक बदलाव और सैन्य हस्तक्षेप होते रहे हैं। ऐसे में यह जनादेश देश की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय