

नई दिल्ली, 10 मार्च (हि.स.)। केंद्रीय बजट के बाद केंद्र सरकार ने 'भारत के देखभाल परिस्थिति को मजबूत करना: 1.5 लाख बहुकुशल देखभाल करने वालों को कुशल बनाना' विषयक वेबिनार आयोजित कर स्वास्थ्य सेवा, कल्याण और संबद्ध सेवाओं में मानकीकृत पाठ्यक्रम और बहु-कौशल मॉड्यूल के जरिए देखभाल करने वालों के लिए रोजगार मार्ग प्रशस्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह सत्र केंद्रीय बजट 2026-27 की उस घोषणा पर केंद्रित रहा जिसमें देखभाल क्षेत्र के लिए एक संरचित और पेशेवर कार्यबल तैयार करने की बात कही गई।
केंद्रीय कौशल विकास मंत्रालय के अनुसार, सत्र में कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी, मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी, मंत्रालय की वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार मनीषा सेन शर्मा, विदेश मंत्रालय के अपर सचिव प्रशांत पिसे, असम के प्रमुख सचिव ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी, एशियाई विकास बैंक की निदेशक मिया ओका, यूनिसेफ की जियोर्जिया वरिस्को, अपोलो मेडस्किल्स लिमिटेड के सीईओ डॉ. श्रीनिवास राव पुलिजाला, पोर्टिया मेडिकल के निदेशक के. गणेश, सोडेक्सो इंडिया के संदीप कुमार, मोबाइल क्रेच की सीईओ सुमित्रा मिश्रा और अन्य विशेषज्ञों ने भाग लिया।
जयंत चौधरी ने कहा कि देखभाल अर्थव्यवस्था भारत के लिए सामाजिक प्राथमिकता और आर्थिक अवसर दोनों है। उन्होंने कहा कि 1.5 लाख बहुकुशल देखभाल करने वालों को प्रशिक्षित करने की पहल से एक पेशेवर इकोसिस्टम तैयार होगा जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार अवसर पैदा करेगा। उन्होंने जापान और इज़राइल जैसे देशों के साथ साझेदारी के जरिए वैश्विक कौशल राजधानी बनने की दिशा में भारत की यात्रा को मजबूत बताया।
देबाश्री मुखर्जी ने कहा कि बजट घोषणा बहुकुशल देखभाल करने वालों को प्रशिक्षित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने पेशेवर प्रशिक्षण, मानकीकृत प्रमाणन और विश्वसनीय करियर मार्ग को देखभाल करने वालों की गरिमा और पहचान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बताया।
मनीषा सेन शर्मा ने कहा कि यह पहल न केवल घरेलू मांग बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रशिक्षित देखभाल पेशेवरों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर