रवि लामिछाने के खिलाफ मामले वापस लेने के फैसले को चुनौती देने वाली रिट पूर्ण पीठ को भेजी गई

11 Mar 2026 15:40:53
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने


काठमांडू, 11 मार्च (हि.स.)। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम सरकार द्वारा रवि लामिछाने के खिलाफ संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के संबंध में दर्ज मामलों को वापस लेने के निर्णय को चुनौती देने वाली रिट याचिका को अंतिम सुनवाई के लिए पूर्ण पीठ (फुल बेंच) के पास भेजने का आदेश दिया है।

न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल और श्रीकांत पौडेल की संयुक्त पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि लामिछाने के खिलाफ आरोपों में संशोधन और मामलों को वापस लेने से जुड़े इस मुद्दे पर अब पूर्ण पीठ अंतिम सुनवाई करेगी। यह निर्णय लामिछाने के कुछ कारोबारी साझेदारों पर भी लागू होता है, जिनमें जीबी राई र पूर्व डीआईजी छविलाल जोशी शामिल हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने इस मामले के अंतिम निपटारे के लिए रिट याचिका को पूर्ण पीठ के पास भेजने का आदेश दिया है। इस याचिका में अदालत से यह आदेश देने की मांग की गई थी कि महान्यायाधिवक्ता (अटॉर्नी जनरल) सविता भंडारी द्वारा आरोप पत्र में संशोधन कर लामिछाने के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के निर्णय को रोका जाए।

लामिछाने के खिलाफ सहकारी ठगी, संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले देश की पांच अलग-अलग जिला अदालतों में दर्ज किए गए थे।सरकार के निर्देश पर अटॉर्नी जनरल भंडारी ने 14 जनवरी को लामिछाने के खिलाफ दर्ज दो गंभीर आरोप—संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग—को वापस लेने का निर्णय लिया था।

हालांकि, सहकारी ठगी से जुड़ा मामला अभी भी कायम है, लेकिन माना जा रहा है कि इससे लामिछाने की चुनावी संभावनाओं पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। यदि संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप वापस ले लिए जाते हैं, तो चितवन-2 से चुनाव जीत चुके लामिछाने के लिए संसद में प्रवेश करने की कानूनी बाधाएँ कम हो जाएंगी। इसके विपरीत यदि ये आरोप कायम रहते हैं, तो चुनाव जीतने के बावजूद लामिछाने सांसद के रूप में शपथग्रहण का कार्य भी नहीं कर पाएंगे।

लामिछाने और उनके सहयोगियों के खिलाफ गोरखा मीडिया से जुड़े सहकारी ठगी, संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले वर्तमान में रुपन्देही, पोखरा, वीरगंज, चितवन और काठमांडू की जिला अदालतों में विचाराधीन हैं। अदालत की पूर्ण पीठ में होने वाली सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका सीधा असर लामिछाने के संसदीय भविष्य पर पड़ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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