
नई दिल्ली, 11 मार्च (हि.स.)। राज्यसभा में बुधवार को ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा हुई। चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा सांसद के. लक्ष्मण ने कहा कि विकसित भारत- रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (जी राम जी) विधेयक ने गांवों में लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया है। इस योजना की पारदर्शिता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत सरकार ने जरूरतमंदों के लिए पक्के मकान तो बनाए ही हैं। साथ ही उन्हें सम्मान भी प्रदान किया है। मुद्रा और उज्ज्वला जैसी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन में बदलाव लाई हैं।
चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने कहा कि केंद्रीय बजट में ग्रामीण विकास के लिए आवंटित धनराशि पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि किसान महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जानी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस
के मोहम्मद नदीमुल हक ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल को पीएम आवास योजना-ग्रामीण के तहत लगभग 25 हजार करोड़ रुपये मिलने बाकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वजह से 11 लाख परिवार बेघर हो गए हैं।
सीपीआई (एम) सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि वीबी-जी राम जी विधेयक ने राज्यों पर 40 प्रतिशत का बोझ डाल दिया है।
चर्चा निरर्थक रही। बाद में सदन ने विशेष उल्लेखों पर विचार किया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
ग्रामीण विकास को लेकर उठी आलोचनाओं का जवाब देते हुए भाजपा के राज्यसभा सांसद सदानंद म्हालू शेट तनावड़े ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में ग्रामीण विकास के बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है और गांवों को विकसित भारत के विज़न के केंद्र में रखा है।
उन्होंने बताया कि 2016-17 में ग्रामीण विकास के लिए लगभग 87,765 करोड़ रुपये का बजट था, जिसे बढ़ाकर 2026-27 में 2.73 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
तनावड़े ने कहा कि बजट में यह बड़ी वृद्धि इस बात का संकेत है कि सरकार गरीबी कम करने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गांवों में दीर्घकालिक समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी