आईआईटी खड़गपुर में प्रथम एसपीएआरसी राष्ट्रीय सम्मेलन

युगवार्ता    11-Mar-2026
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प्रोफ़ेसर सुमन चक्रवर्ती निदेशक आईआईटी खड़गपुर


आईआईटी खड़गपुर ने स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ एकेडमिक एंड रिसर्च कोलैबोरेशन


खड़गपुर, 11 मार्च (हि. स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर ने स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ एकेडमिक एंड रिसर्च कोलैबोरेशन (एसपीएआरसी) के राष्ट्रीय समन्वय के रूप में बुधवार को दो दिवसीय एसपीएआरसी राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह सम्मेलन शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन कोलकाता के राजारहाट स्थित आईआईटी खड़गपुर रिसर्च पार्क में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य वैश्विक शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को और सशक्त बनाना था।

एसपीएआरसी कार्यक्रम से जुड़े भारतीय प्रधान अन्वेषकों (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर), अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान किया गया, जहां परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा और अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में देशभर के विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों से लगभग 400 संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्घाटन शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव एमस्ट्रांग पामे ने किया। इस अवसर पर आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती तथा एसपीएआरसी के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. रबीब्रत मुखर्जी भी उपस्थित रहे।

उद्घाटन सत्र में फ्रांस के प्रतिष्ठित शिक्षाविद डेविड क्यूर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जो ईएसपीसीआई पेरिस और इकोले पॉलीटेक्निक से जुड़े हैं। वक्ताओं ने अपने संबोधन में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को आगे बढ़ाने और नवाचार को प्रोत्साहित करने में सतत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न पैनल चर्चाएं, प्रस्तुतियां और संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने एसपीएआरसी समर्थित परियोजनाओं के क्रियान्वयन, प्रगति और उपलब्धियों से जुड़े अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम के समन्वयन में एसपीएआरसी की संयुक्त राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. सुदेशना सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह सम्मेलन भारत की बढ़ती वैश्विक अनुसंधान उपस्थिति को रेखांकित करता है और युवा शोधकर्ताओं तथा नवोन्मेषकों के लिए नए अवसरों को सामने लाता है।

एसपीएआरसी राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को आगे बढ़ाने और भारत को मजबूत वैश्विक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।-----------------

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

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