
नई दिल्ली, 13 मार्च (हि.स)। पश्चिम एशिया संघर्ष एवं भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने दिसंबर में आर्थिक वृद्धि दर 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।
फिच रेटिंग्स ने शुक्रवार को ‘ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट में भारत के विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 7.5 फीसदी किया है। एजेंसी का कहना है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू मांग जीडीपी वृद्धि का सबसे बड़ा कारक रहने वाली है। फिच ने इस रिपोर्ट में वर्ष 2026 के दौरान विश्व की जीडीपी वृद्धि 2.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। रेटिंग एजेंसी का यह अनुमान इस शर्त पर है कि ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में कोई बड़ी और लंबे समय तक चलने वाली बढ़ोतरी नहीं होगी और कच्चे तेल की औसत वार्षिक कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर नहीं जाएगी।
फिच रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कुल्टन ने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर तक पहुंच जाएं और वहां टिकी रहें, तो यह वैश्विक आपूर्ति के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। भारत के संबंध में फिच ने कहा कि जनवरी और फरवरी में वास्तविक गतिविधियों के धीमे होने के अस्थायी संकेत मिले हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था जुझारू बनी हुई है और ऋण वृद्धि अभी भी दहाई अंकों में है। उम्मीद कि अगले वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में वृद्धि दर धीमी होगी, क्योंकि बढ़ती महंगाई वास्तविक आय को प्रभावित करेगी। उपभोक्ता खर्च की वृद्धि को सीमित करेगी।
रिपोर्ट में कह गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर सालाना आधार पर धीमी होकर 7.8 फीसदी रही है, जो जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.4 फीसदी थी। अनुमान जताया गया है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.5 फीसदी रहेगी, जो दिसंबर के अनुमान से मामूली रूप से अधिक है। इस साल घरेलू मांग वृद्धि का सबसे बड़ा चालक है, जिसमें चालू वित्त वर्ष के दौरान उपभोक्ता खर्च और निवेश में क्रमशः (अनुमानित) 8.6 फीसदी और 6.9 फीसदी की वृद्धि हुई है।’
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर