

नई दिल्ली, 13 मार्च (हि.स)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि सरकार एक लाख करोड़ रुपये का 'आर्थिक स्थिरीकरण कोष' स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि यह कोष वैश्विक स्तर पर आने वाली अस्थिर चुनौतियों का मुकाबला और भारत की वित्तीय मजबूती को सुदृढ़ करने में करेगी।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह कोष पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट जैसी आकस्मिक वैश्विक चुनौतियों से लगने वाले झटकों को झेलने के लिए एक ‘बफर’ के तौर पर काम करेगा। उन्होंने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये का आर्थिक स्थिरीकरण कोष भारत को वैश्विक मुश्किलों का सामना करने के लिए वित्तीय सुदृढ़ता देगा। अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच के ज़रिए सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में 2.81 लाख करोड़ रुपये के सकल अतिरिक्त व्यय के लिए लोकसभा से मंजूरी मांगी है, जिसे सदन ने अपनी मंजूदी दे दी है।
सीतारमण ने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा संशोधित अनुमानों (आरई) के भीतर होगा। उन्होंने सदन को बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष के लिए केंद्रीय बजट में 80,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्राप्तियों के साथ कुल अतिरिक्त नकदी व्यय 2.01 लाख करोड़ रुपये होगा। वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि किसानों के लिए उर्वरकों की कोई कमी नहीं होगी और अनुदान की अनुपूरक मांगों में इसका पूरा ध्यान रखा गया है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब मैं इस बारे में बात कर रही हूं कि सरकार किसी भी अप्रत्याशित घटना, जिसमें सप्लाई चेन में रुकावटें और एलपीजी शामिल हैं, का सामना करने की तैयारी कैसे कर रही है, तब भी वे (विपक्ष) मेरा जवाब सुनने को तैयार नहीं हैं। वे अपना ही एजेंडा चलाना चाहते हैं। सीढ़ियों पर बैठकर चाय पीते हैं और एलपीजी के बारे में बातें करते हैं। यही है हमारा विपक्ष।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर