(लीड) इराक में अमेरिकी सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त, चार की मौतः सेंटकॉम

युगवार्ता    13-Mar-2026
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प्रतिकात्मक तस्वीर


लंदन/वाशिंगटन, 13 मार्च (हि.स.)। इराक में अमेरिकी सेना का एरियल रीफ्यूलिंग विमान केसी-135 दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में चार सैन्य कर्मियों की मौत हो गयी। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे में शामिल दो बोइंग कंपनी के केसी-135 विमानों में से एक क्रैश हो गया, जबकि दूसरा सुरक्षित उतरा। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह घटना न तो अपनी तरफ से हुई गोलीबारी के कारण हुई और न ही दुश्मन की गोलीबारी से।

अमेरिकी सेंट्रल कमान ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पोस्ट में कहा, 12 मार्च की दोपहर लगभग 2 बजे पश्चिमी इराक़ में एक अमेरिकी केसी-135 रीफ़्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बचाव कार्य जारी रहने के बीच विमान में सवार चालक दल के छह सदस्यों में से चार की मौत हो गई। इस घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इराक में इस्लामिक रेज़िस्टेंस नाम के संगठन ने इस विमान पर हमले की ज़िम्मेदारी ली है। हालांकि अमेरिकी सेना ने इसे दुश्मन का हमला नहीं माना है और बताया है कि विमान वहां गिरा जहां 'दोस्त देश का एयर स्पेस' था। रीफ़्यूलिंग विमान लड़ाकू विमान में हवा में ही ईंधन भरता है।

ऑस्ट्रेलियाई प्रसारण निगम (एबीसी) और अमेरिकी वेबसाइट फाॅक्स 8 के अनुसार पश्चिमी इराक में अमेरिकी सेना का एक एरियल रीफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार चार सैन्य कर्मियों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त विमान में चालक दल के छह सदस्य सवार थे। इनमें से चार की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दो की तलाश जारी है। यह दुर्घटना दुश्मन की गोलीबारी या ‘फ्रेंडली फायर’ के कारण नहीं हुई। फिलहाल, हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह घटना “मित्र देशों के हवाई क्षेत्र” में चल रहे सैन्य अभियान के दौरान हुई। मृत सैनिकों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है और उनके परिवारों को सूचना देने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नाम जारी किए जाएंगे।

केसी-135 विमान अमेरिकी वायुसेना का प्रमुख एरियल रीफ्यूलिंग विमान है, जिसे बोइंग कंपनी ने बनाया है। इसे पहली बार 1956 में सेवा में शामिल किया गया था। यह विमान लगभग 150,000 पाउंड तक ईंधन ले जा सकता है। इसकी रेंज करीब 1,500 मील तक मानी जाती है। यह हवा में ही अन्य सैन्य विमानों को ईंधन भरने में सक्षम है, जिससे लंबी दूरी के मिशन संभव हो पाते हैं।

यह दुर्घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध जारी है, जिसका शुक्रवार को 14वां दिन था। हाल के दिनाें में अमेरिका-इजराइल ने ईरान के अंदर कई ठिकानों पर हमले किए, जबकि तेहरान भी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इजराइली सैन्य ठिकानाें को निशाना बना रहा है।

सेंटकॉम के मुताबिक 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर करीब 6,000 ठिकानों पर हमले किए हैं और 90 से अधिक ईरानी जहाजों को निशाना बनाया। इसके अलावा 90 से अधिक ईरानी जहाज़ों को निशाना बनाया है या डुबो दिया है, जिनमें 30 से अधिक बारूदी सुरंगें बिछाने वाली नावें शामिल हैं। पेंटागन के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक कम से कम सात अमेरिकी सैनिकों की मौत और 140 से अधिक घायल हो चुके हैं।---------------------

हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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