महाराष्ट्र विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ विधेयक पेश

युगवार्ता    13-Mar-2026
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फाईल फोटो: मुंबई में स्थित विधानभवन


मुंबई, 13 मार्च (हि.स.)। महाराष्ट्र विधानसभा में देवेंद्र फडणवीस सरकार ने शुक्रवार को ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ नामक विधेयक पेश किया। इस विधेयक का मकसद गैर-कानूनी धर्मांतरण पर रोक लगाना है।

विधानसभा में यह विधेयक पेश करने वाले गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने कहा, बिल का मकसद धर्म की आज़ादी के अधिकार की रक्षा करना है। इसका मकसद ज़बरदस्ती, धोखाधड़ी, लालच या शादी के ज़रिए किए गए गैर-कानूनी धर्मांतरण पर भी रोक लगाना है। बिल में गैर-कानूनी धर्मांतरण को ज़बरदस्ती, धोखाधड़ी, गलत जानकारी, ज़बरदस्ती, गलत असर या लालच देकर किया गया धर्मांतरण बताया गया है। बिल के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति या संस्था किसी दूसरे व्यक्ति को तोहफ़े, कैश, नौकरी, मुफ़्त शिक्षा, शादी का वादा, बेहतर लाइफ़स्टाइल, या भगवान का का लालच देकर गैर-हिंदू धर्म में अन्य धर्म में बदलने की कोशिश नहीं कर सकती, जिसे लालच माना गया है। लालच, ज़बरदस्ती, धोखा या गलत जानकारी, ज़बरदस्ती या धमकी, धोखाधड़ी के तरीके और गलत असर डालना गैर-कानूनी होगा। विधेयक में ज़बरदस्ती किसी व्यक्ति या ग्रुप को उसकी मर्जी के खिलाफ़ धर्म बदलने के लिए मजबूर करने के काम गैरकानूनी धर्म परिवर्तन बतलाया गया है।

यह विधेयक गैर-हिंदू धर्म में बदलने की प्रोसेस में शामिल लोगों के रिश्तेदारों या करीबी परिवार के सदस्यों को गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करने की इजाज़त देता है, जिससे पुलिस जांच शुरू हो सकती है। कानून के तहत अपराध गैर-ज़मानती होंगे, जिससे पुलिस को ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन के आरोप में केस दर्ज करने और जांच शुरू करने की इजाज़त मिलेगी। विधेयक पुलिस स्टेशन के इंचार्ज के लिए किसी भी व्यक्ति की शिकायत दर्ज करना ज़रूरी बनाता है। बिल के सेक्शन 14 में गैर-हिंदू धर्मों में धर्म बदलने के लिए उकसाने वाले संगठनों पर बैन लगाने और उन्हें सज़ा देने के कानूनी प्रावधान हैं।

दूसरे राज्यों में लागू ऐसे ही कानूनों के आधार पर बिल में शामिल कानूनी प्रावधानों में, जो लोग गैर-हिंदू धर्मों में धर्म बदलना चाहते हैं, उनके लिए एक तय सरकारी अथॉरिटी से पहले इजाज़त लेना, धर्म बदलने से 60 दिन पहले पहले से बताना और धर्म बदलने के बाद उसे रजिस्टर कराना शामिल है। महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट, 2026 के ड्राफ्ट के प्रावधानों के अनुसार, धर्म बदलने को रजिस्टर न करने या प्रक्रियाओं का पालन न करने पर कोई भी धर्म बदलना अमान्य हो सकता है। विधेयक के अनुसार, शादी का झांसा देकर गैर-कानूनी धर्म बदलने में शामिल पाए जाने वालों को सात साल की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना भी देना होगा। किसी नाबालिग, पागल व्यक्ति या महिला या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति का धर्म बदलने के लिए उकसाने की कोशिश करने पर सात साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। विधेयक के मुताबिक, बड़े पैमाने पर धर्म बदलने के लिए उकसाने वालों को सात साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा, जबकि बार-बार ऐसा करने वालों को 10 साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा। विधेयक के मुताबिक, ज़बरदस्ती धर्म बदलने के दोषी पाए जाने वालों को 7 साल तक की जेल और 3 लाख रुपये का जुर्माना होगा।

फडणवीस की महायुति सरकार का कहना है कि अल्पसंख्यकों के बनाए शिकारी धर्म बदलने के रैकेट से कमज़ोर बहुसंख्यक हिंदुओं को बचाने के लिए ऐसा धर्म बदलने के खिलाफ़ कानून ज़रूरी है। महाराष्ट्र धर्म की आज़ादी बिल, 2026 उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे दूसरे राज्यों के ऐसे ही धर्म बदलने के खिलाफ़ कानूनों पर आधारित है। फोटो: महाराष्ट्र विधान भवन

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

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