तमिल साहित्यकार आर. वैरामुथु को ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की घोषणा

14 Mar 2026 18:08:53
प्रतीकात्मक चित्र


नई दिल्ली, 14 मार्च (हि.स.)। भारतीय ज्ञानपीठ ने शनिवार को तमिल कवि, गीतकार और लेखक आर. वैरामुथु को वर्ष 2025 के लिए देश का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान 60वां ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की घोषणा की। उन्हें यह सम्मान तमिल साहित्य में उल्लेखनीय योगदान और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रदान किया जाएगा।

भारतीय ज्ञानपीठ की चयन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। समिति ने शनिवार को कहा कि तमिल एक समृद्ध भाषा होने के बावजूद अब तक केवल दो लेखकों पीवी अखिलंदम (1975) और डी. जयकान्तन (2002) को ही यह सम्मान मिला था। आर. वैरामुथु को यह पुरस्कार मिलना उस अंतराल को भरने का कार्य करेगा।

प्रो. प्रतिभा राय की अध्यक्षता में हुई समिति में माधव कौशिक, दामोदर माउजो, डॉ. सुरंजन दास, डॉ. ए. कृष्णा राव, प्रफुल्ल शिलेदार, डॉ.केसु भाई देसाई, डॉ. जानकी प्रसाद शर्मा, डॉ.के. श्रीनिवास राव और ज्ञानपीठ के वरिष्ठ प्रकाशन अधिकारी डॉ. महेश्वर शामिल थे। चयन समिति की बैठक के प्रारम्भ में ज्ञानपीठ के अध्यक्ष जस्टिस विजेंद्र जैन तथा ज्ञानपीठ के निदेशक मधुसूदन आनंद को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

तमिल के प्रसिद्ध कवि गीतकार और लेखक आर. वैरामुथु का जन्म 13 जुलाई 1953 को तमिलनाडु में हुआ। समकालीन तमिल साहित्य के महत्वपूर्ण रचनाकारों में गिने जाते हैं। उनकी कविताओं और लेखन में मानवीय संवेदना सामाजिक सरोकार और प्रकृति के प्रति गहरी संवेदनशीलता का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।

वैरामुथु ने कविता गीत और गद्य तीनों क्षेत्रों में 37 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में कल्लिकाडू इथिहासम,', 'करुवाची काव्यम', 'तन्नी देसम' और मोंद्रम उलागा पोर तन्नी देसम, और मोंद्रम उलागा पोर (तीसरा विश्व युद्ध) शामिल हैं। उनको अब तक 7 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ गीतकार) पद्म भूषण (2014), पद्म श्री (2003) और साहित्य अकादमी पुरस्कार (2003) से सम्मानित किया जा चुका है। उनके उपन्यास 'कल्लिकाडू इथिहासम' के लिए तथा तमिलनाडु सरकार द्वारा कला में योगदान के लिए कलैमामणि पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है जो भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्य सृजन के लिए दिया जाता है। इस सम्मान के अंतर्गत विजेता को कई वस्तुएं भेंट की जाती हैं। इनमें 11 लाख रुपये की नकद राशि वाग्देवी (सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र शामिल है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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