
श्रीनगर, 14 मार्च (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने केंद्र सरकार द्वारा लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत रद्द किए जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि किसी पर्यावरणविद् पर इस तरह का कड़ा कानून लगाना शुरुआत से ही उचित नहीं था।
श्रीनगर में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सोनम वांगचुक पर्यावरण संरक्षण के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं और उनके खिलाफ एनएसए जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक कदम है कि सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त कर दी और उन्हें उनका अधिकार मिला।
इस दौरान मुफ्ती ने अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को उच्चतम न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के फैसले का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय का यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास को मजबूत करता है।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अभी भी कई लोग गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत जेलों में बंद हैं। उनके अनुसार, इनमें से कई लोगों के पास कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और कुछ लोग बिना मुकदमे के वर्षों से जेल में बंद हैं। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों की समीक्षा करने और न्याय सुनिश्चित करने की अपील की।
दरअसल, केंद्र सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि लेह में हिंसक प्रदर्शनों के बाद हुई गिरफ्तारी के लगभग छह महीने बाद सोनम वांगचुक की एनएसए के तहत हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। इन प्रदर्शनों के दौरान चार लोगों की मौत हुई थी। सरकार का कहना है कि यह निर्णय लद्दाख में शांति बनाए रखने और हालात सामान्य करने के उद्देश्य से लिया गया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया जब वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च तक स्थगित कर दी थी। याचिका में एनएसए के तहत की गई हिरासत को चुनौती दी गई थी।
उल्लेखनीय है कि एनएसए के तहत केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लेने का अधिकार होता है, जिनकी गतिविधियों को देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक माना जाता है। इस कानून के तहत अधिकतम 12 महीने तक की हिरासत का प्रावधान है, हालांकि सरकार चाहे तो इसे पहले भी समाप्त कर सकती है।
महबूबा मुफ्ती ने पत्रकारों को यह भी बताया कि पार्टी की हालिया बैठक में कश्मीर की मौजूदा स्थिति और ईरान के समर्थन में हुए प्रदर्शनों पर भी चर्चा की गई। उन्होंने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण कई लोगों को पिछले लगभग दो सप्ताह से हिरासत में रखा गया है।
मुफ्ती ने कहा कि कश्मीरियों के दिलों में ईरान के लिए विशेष स्थान है, क्योंकि इस्लाम कश्मीर में ईरान के माध्यम से पहुंचा था। उन्होंने कहा कि कश्मीरी लोग स्वाभाविक रूप से ईरान के लोगों के दर्द को महसूस करते हैं।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से अपील की कि ईरान के समर्थन में हुए हालिया प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा किया जाए। पीडीपी की बैठक में ईरान के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करने वाला प्रस्ताव भी पारित किया गया और मुस्लिम देशों से इस कठिन समय में ईरान की सहायता करने की अपील की गई।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह