
नई दिल्ली, 14 मार्च (हि.स.)। भारत में लाइकेन मॉथ की दो नई प्रजातियों की खोज की गई है। इस महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को बधाई दी है।
यह खोज जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों ने की है। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में लाइकेन मॉथ की दो नई प्रजातियों की पहचान की। इन नई प्रजातियों का नाम कौलोसेरा होलोवेई और असुरा बक्सा रखा गया है।
केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने एक्स पर साझा अपने संदेश में कहा कि लेपिडोप्टेरा (कीटों का एक गण है जिसमें तितलियां और पतंगे शामिल होते है) जैसे विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण लेकिन अपेक्षाकृत कम अध्ययन किए गए समूहों पर शोध, पारिस्थितिकी तंत्र के कार्यकरण को समझने के लिए आवश्यक है। इसके साथ यह भारतीय हिमालय में वायु प्रदूषण के संकेतक प्रजातियों की पहचान के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। यह उपलब्धि हिमालय जैसे जैवविविधता हॉटस्पॉट में निरंतर वर्गिकी अनुसंधान की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इन प्रजातियों की पहचान उनके पंखों के रंग-रूप, शरीर की बनावट और अन्य सूक्ष्म जैविक विशेषताओं के आधार पर की गई। यह शोध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका जूटेक्सा में प्रकाशित हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लाइकेन मॉथ पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि इनके लार्वा लाइकेन पर निर्भर रहते हैं। लाइकेन वायु प्रदूषण के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं, इसलिए इन मॉथ की मौजूदगी पर्यावरण की स्थिति का संकेत भी देती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस खोज से पूर्वी हिमालय क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को समझने में मदद मिलेगी और भविष्य में संरक्षण संबंधी प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी