सांस्कृतिक जिज्ञासुओं का वैश्विक केंद्र बनेगा श्रीराम जन्मभूमि, रामराज्य के आदर्शों का पुनर्स्मरण कराएगा श्रीराम यंत्र

युगवार्ता    15-Mar-2026
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राम मंदिर।


राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू।


मर्यादा पुरुषाेत्तम प्रभु श्रीराम।


- आध्यात्मिक ऊर्जा का नया आयाम, सनातन संस्कृति और रामराज्य के आदर्शों को समझने दुनियाभर से आएंगे लोग

अयाेध्या, 15 मार्च (हि.स.)। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या अब केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि विश्वभर के सांस्कृतिक जिज्ञासुओं और शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनती जा रही है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हाेने वाले श्रीराम यंत्र की स्थापना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक और दार्शनिक आयाम को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करेगा।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने 'हिन्दुस्थान समाचार' काे बातचीत में बताया कि आगामी 19 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर राष्ट्रपति द्राैपदी मुर्मु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल स्थित गर्भगृह में श्रीराम यंत्र की स्थापना करेंगी। यह आयोजन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित होगा। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर ऐसे ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है, जो केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन संस्कृति के वैश्विक संदेश को पुनर्स्थापित करने का प्रतीक होगा।

सनातन संस्कृति का वैश्विक आयाम

ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने कहा कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद यह स्थान केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर के श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। ऐसे में यह नगरी अब केवल तीर्थस्थल नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन दर्शन को समझने के लिए वैश्विक मंच के रूप में उभर रही है। श्रीराम यंत्र की स्थापना को सनातन दर्शन की उसी आध्यात्मिक परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारतीय संस्कृति की मूल भावना वसुधैव कुटुम्बकम और भगवान श्रीराम के आदर्श- सत्य, धर्म, करुणा और न्याय आज भी विश्व समाज को मार्गदर्शन देने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में अयोध्या में होने वाला यह अनुष्ठान केवल मंदिर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह संदेश देगा कि भारतीय संस्कृति का मूल उद्देश्य सम्पूर्ण मानवता के कल्याण की भावना है।

आस्था से आगे, संस्कृति और दर्शन का केंद्र

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डाॅ. अनिल ने बताया कि अयोध्या सदियों से भारतीय आस्था का केंद्र रही है, लेकिन भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद यह शहर अब भारतीय सभ्यता, संस्कृति और दर्शन को समझने के लिए भी वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहासकारों, सांस्कृतिक शोधकर्ताओं और अध्यात्म के जिज्ञासुओं के लिए अयोध्या एक जीवंत विरासत के रूप में सामने आ रही है। श्रीराम यंत्र की स्थापना को इसी सांस्कृतिक विरासत को और सशक्त करने वाला कदम माना जा रहा है। सनातन परंपरा में यंत्रों को ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है और मंदिरों में इनकी स्थापना आध्यात्मिक शक्ति के केंद्र के रूप में की जाती है।

रामराज्य के आदर्शों को समझने का माध्यम

श्रीराम यंत्र भगवान श्रीराम के आदर्शों- धर्म, मर्यादा, न्याय और लोककल्याण का प्रतीक माना जाता है। यही आदर्श रामराज्य की अवधारणा की नींव हैं। सिद्धपीठ श्रीहनुमत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज ने कहा कि रामराज्य केवल धार्मिक अवधारणा नहीं बल्कि एक ऐसी सामाजिक और नैतिक व्यवस्था का प्रतीक है जिसमें शासन का उद्देश्य जनकल्याण, न्याय और समानता होता है। ऐसे में श्रीराम यंत्र की स्थापना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि उस सांस्कृतिक दर्शन को जीवंत करने का प्रयास भी है जिसने भारतीय समाज को सदियों तक दिशा दी है।

राज्यपाल, मुख्यमंत्री व संत-समाज भी रहेगा माैजूद

इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अमृतानंदमयी मां, वीरेंद्र हेगड़े और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा इसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास, महासचिव चम्पत राय, कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि, जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु मध्वाचार्य विश्वप्रसन्न तीर्थ, युग पुरुष परमानंद गिरि, महंत दिनेंद्र दास केशव पारासरन, निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र, डाॅ. अनिल मिश्र, कृष्ण मोहन समेत अनेक संत-महात्मा और गणमान्य व्यक्ति शामिल हाेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश

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