दिल्ली में दो दिवसीय 'पॉलिटिकल साइंस कॉन्क्लेव 2026' का सफल आयोजन

17 Mar 2026 15:59:53
'पॉलिटिकल साइंस कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन


नई दिल्ली, 17 मार्च (हि.स.)। पॉलिटिकल साइंस सोसाइटी की ओर से दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में दो दिवसीय 'पॉलिटिकल साइंस कॉन्क्लेव 2026' का सफल आयोजन किया गया। इसमें देशभर के 300 से अधिक विद्वानों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों ने समकालीन भारत में राजनीति, शासन और सार्वजनिक नीति को आकार देने वाले गंभीर विषयों पर मंथन किया।

इस सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने किया। उन्होंने राजनीति विज्ञान को एक 'गतिशील अनुशासन' बताते हुए कहा कि यह न केवल शासन बल्कि कूटनीति और सार्वजनिक नीति को भी दिशा प्रदान करता है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष राम माधव ने अपने संबोधन में राजनीतिक सिद्धांत में भारतीय सभ्यतागत विचारों के साथ गहन जुड़ाव की आवश्यकता पर बल दिया तथा विद्वानों से औपनिवेशिक ढांचों से आगे बढ़ने का आग्रह किया।

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने स्वतंत्रता के बाद की नीति-निर्माण प्रक्रिया में औपनिवेशिक धारणाओं के निरंतर प्रभाव पर प्रकाश डाला।

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. संजीव चोपड़ा ने राजनीतिक सिद्धांत को व्यवहार से सीखने की आवश्यकता पर बल दिया और शांति पर्व जैसी भारतीय परंपराओं तथा भारत में विकेंद्रीकरण सुधारों के अनुभवों का उल्लेख किया।

इसके अलावा सत्रों में डॉ. निरंजन साहू (ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन), प्रो. अश्विनी महाजन, प्रो. अशोक आचार्य, प्रो. पम्पा मुखर्जी, प्रो. हरिहर भट्टाचार्य और प्रो. आशुतोष कुमार सहित कई विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। इसके साथ ही हांस साइडल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों और प्रसिद्ध शिक्षिका शुभ्रा रंजन ने भी सहभागिता की। इस सत्र की अध्यक्षता राजनीति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एवं अध्यक्ष प्रो एमपी सिंह ने की।

दो दिनों तक (12-13 मार्च) चले विभिन्न सत्रों में कई ज्वलंत विषयों पर चर्चा हुई। इनमें डिकॉलोनाइजिंग पॉलिटिकल साइंस, प्रौद्योगिकी और लोकतंत्र, संघवाद और शासन शामिल हैं। समापन सत्र की अध्यक्षता हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने की।

इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कॉन्क्लेव को “राजनीतिक विज्ञान का अर्ध कुंभ” की संज्ञा दी और शैक्षणिक विमर्श में भारतीय बौद्धिक परंपराओं को अधिक स्थान देने का आह्वान किया। वहीं, जाजपुर के सांसद आर एन बेहरा ने संसदीय कार्यों में तकनीक की भूमिका पर चर्चा की।

सम्मेलन के शैक्षणिक खंड में 12 समानांतर सत्र आयोजित किए गए। इनमें देशभर से आए शोधकर्ताओं ने 150 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस आयोजन में इंडिया फाउंडेशन, ऋषिहुड विश्वविद्यालय, मिरांडा हाउस और हिंदू कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का विशेष सहयोग रहा।

सम्मेलन का संयोजन दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. रेखा सक्सेना द्वारा किया गया जबकि डीयू की सहायक प्रोफेसर डॉ. स्वदेश सिंह ने सह-संयोजक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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