
दार्जिलिंग, 02 मार्च (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले गोरखालैंड का मुद्दा फिर सियासी चर्चा में है। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय स्तर के नेता नितिन नवीन के साथ हुई बैठक में गोरखा समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपनी पुरानी मांगों को सामने रखा।
गोरखा नेताओं ने साफ कहा कि यदि गोरखालैंड का गठन संभव नहीं है, तो उत्तर बंगाल को केंद्रशासित प्रदेश बनाया जाए। यह बैठक बंगाल भाजपा की ‘परिवर्तन यात्रा’ के सिलसिले में सिलीगुड़ी में हुई, जहां गोरखा समुदाय के प्रतिनिधियों ने नितिन नवीन का पारंपरिक गोरखा टोपी पहनाकर स्वागत किया।
बैठक में गोरखा समुदाय ने पहाड़ क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि वर्ष 2007 के आंदोलन के बाद गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) का गठन हुआ, लेकिन समाधान नहीं हो सका। गोरखालैंड की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत गोरखा समुदाय का कहना है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य विभाजन का सवाल भाजपा के लिए भी संवेदनशील है, फिर भी इस बार गोरखाओं ने वैकल्पिक तौर पर उत्तर बंगाल को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग उठाई है। बैठक के बाद दार्जिलिंग से भाजपा विधायक नीरज जिम्बा ने कहा कि जब गोरखाओं के साथ बैठक होगी, तो गोरखालैंड का मुद्दा उठना स्वाभाविक है। दार्जिलिंग से भाजपा सांसद राजू बिस्ता ने कहा कि हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है।
भाजपा चाहती है कि सभी समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए हो। 2026 में अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो पहाड़ की समस्या का स्थायी समाधान जरूर होगा। सिलीगुड़ी से भाजपा विधायक शंकर घोष ने कहा कि बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी पूरी जानकारी उन्हें नहीं है, लेकिन पार्टी संतुलन बनाए रखते हुए पहाड़ की समस्या का समाधान खोजेगी।
उल्लेखनीय है कि, पहाड़ी इलाकों में भाजपाको लंबे समय तक समर्थन मिला है और दार्जिलिंग लोकसभा सीट पर पार्टी लगातार जीत दर्ज करती रही है। इसके बावजूद गोरखा समुदाय का आरोप है कि उनकी मांगें अब तक पूरी नहीं हुईं। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार द्वारा मध्यस्थ नियुक्त किए जाने के बाद नितिन नवीन की यह बैठक सियासी रूप से काफी अहम मानी जा रही है। ---------------
हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय