लंदन/ब्रुसेल्स, 21 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक चिंता और बढ़ गई है। 20 से अधिक देशों—जिनमें ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं—ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सहयोग देने की इच्छा जताई है।
करीब 22 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान द्वारा इस अहम जलमार्ग को बंद करने और खाड़ी क्षेत्र में नागरिक जहाजों व ऊर्जा ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की। इन देशों ने कहा कि वे सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदमों में भाग लेने को तैयार हैं और इसके लिए प्रारंभिक योजनाओं पर काम भी जारी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से सामान्यतः वैश्विक तेल और गैस का करीब 20 प्रतिशत परिवहन होता है। लेकिन ईरान द्वारा किए गए ‘डी-फैक्टो’ अवरोध और लगातार हमलों के चलते ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।
विश्लेषण के अनुसार, 01 से 19 मार्च के बीच इस मार्ग से केवल 116 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई, जो सामान्य समय की तुलना में लगभग 95 प्रतिशत कम है। इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों को तेजी से बढ़ा दिया है।
संयुक्त बयान में शामिल देशों ने नागरिक बुनियादी ढांचे—खासकर तेल और गैस संयंत्रों—पर हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए कदम उठाने की अपील की।
उल्लेखनीय है कि यह संकट उस समय और गहरा गया जब अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों और समुद्री जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। ऐसे में अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय