कबीर भजनों और सूफी गायकी के साथ आईजीएनसीए के 39वें स्थापना दिवस का भव्य समापन

21 Mar 2026 20:51:53
सांस्कृतिक कार्यक्रम


नई दिल्ली, 21 मार्च (हि.स.)। दिल्ली स्थित इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के 39वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का शनिवार को पद्मश्री भेरू सिंह चौहान के कबीर भजनों और डॉ. ममता जोशी की सूफी गायकी प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ।

19 से 21 मार्च तक चले इस भव्य आयोजन ने 'शास्त्र' और 'लोक' के अनूठे समन्वय से भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता को जीवंत कर दिया।

समारोह का तीसरा एवं समापन दिवस (21 मार्च) लोक संगीत के विविध रंगों से सराबोर रहा। समापन दिवस पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत अपराह्न 4 बजे असम के बागुरुम्बा नृत्य से हुई, जिसे स्वगता सरमा एवं संस्कृति समूह ने प्रस्तुत किया। इसके बाद, 4.30 बजे हिमाचल प्रदेश का पारम्परिक नटी नृत्य प्रेम चंद बाउनाली और उनके दल द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें पहाड़ी संस्कृति की सहजता और उल्लास झलक उठा।

शाम 5 बजे गुजरात का प्रसिद्ध तलवार रास निलेश परमार एवं समूह द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसने वीरता और सामूहिकता का अद्भुत प्रदर्शन किया। इसके बाद 5.30 बजे केरल की प्राचीन मार्शल आर्ट ‘कलारिपयट्टु’ का रोमांचक प्रदर्शन कृष्णदास गुरुक्कल एवं वल्लभट्टा कलारी समूह द्वारा किया गया, जिसने दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया।

संध्या के कार्यक्रमों में 6 बजे पद्मश्री भेरू सिंह चौहान (मध्य प्रदेश) ने ‘मन लागो मेरो यार फकीरी में’ आदि कबीर के भजन सुनाकर कर श्रोताओं को एक अलग ही दुनिया में पहुंचा दिया। उनके गायन में संत कबीर की वाणी का गूढ़ आध्यात्मिक भाव मुखर हुआ। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की आखिरी कड़ी के रूप में करीब 7 बजे सूफी गायिका डॉ. ममता जोशी ने सूफी एवं कबीर गायन की प्रस्तुति दी, जिसने पूरे वातावरण को भक्ति और सूफियाना रंग में रंग दिया।

इस दौरान कलाकारों को सम्मानित भी किया गया।

समारोह के शुरुआती दो दिन शास्त्रीय विदुषियों के नाम रहे। 19 मार्च को शुरू हुए उत्सव के पहले दिन 'पद्म विभूषण' डॉ. सोनल मान सिंह ने “नाट्य कथा देवी” के माध्यम से अपनी सशक्त कलात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। वहीं दूसरे दिन डॉ. पद्मा सुब्रमण्यम ने ‘भगवद्गीता’ पर आधारित दो घंटे की नृत्य-नाट्य प्रस्तुति दी। उनकी ऊर्जा और भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

स्थापना दिवस के पहले दिन तीन प्रमुख प्रदर्शनियों का उद्घाटन किया गया, जो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इनमें कलादृष्टि (2016-2026): संस्थान की पिछले एक दशक की गौरवपूर्ण यात्रा को दर्शाती फोटोग्राफिक प्रदर्शनी, ब्रीदिंग हाइड्स: आंध्र प्रदेश की पारंपरिक चमड़ा कठपुतली कला पर आधारित आख्यान, थेवा कला: राजस्थान की दुर्लभ स्वर्णकारी तकनीक पर केंद्रित प्रदर्शनी शामिल हैं।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ बौद्धिक विमर्श के अंतर्गत 'कलाकोश' प्रभाग द्वारा बहुप्रतीक्षित पुस्तक शृंखला ‘कलातत्त्वकोश’ के आठवें खंड का लोकार्पण किया गया। विद्वानों ने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा का एक अमूल्य दस्तावेज बताया जो कला की मूलभूत अवधारणाओं को समझने में सहायक सिद्ध होगा।

इस प्रतिनिधिमंडल में आईजीएनसीए के अध्यक्ष राम बहादुर राय, सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी, डॉ. सोनल मानसिंह (पूर्व सांसद), डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम, प्रसून जोशी, हर्षवर्धन नेओटिया, डॉ. भारत गुप्त, डॉ. संध्या पुरेचा, देवेंद्र शर्मा, रति विनय झा, प्रो. निर्मला शर्मा, बिरद याज्ञिक, प्रो. कुलदीप अग्निहोत्री और वंदना जैन शामिल थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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