दत्तात्रेय होसबाले ने सीमांत क्रीड़ा महोत्सव में खिलाड़ियों से किया संवाद

23 Mar 2026 22:19:53
असमः गुवाहाटी के सरुसजाई स्थित अर्जुन भोगेश्वर बरुवा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित सीमांत क्रीड़ा महोत्सव ’26 में उपस्थित आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले


असमः गुवाहाटी के सरुसजाई स्थित अर्जुन भोगेश्वर बरुवा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित सीमांत क्रीड़ा महोत्सव ’26 में हिस्सा लेते प्रतिभागी


गुवाहाटी, 23 मार्च (हि.स.)। सीमांत क्रीड़ा महोत्सव ’26 के दूसरे दिन सोमवार को गुवाहाटी के सरुसजाई स्थित अर्जुन भोगेश्वर बरुवा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह (अखिल भारतीय महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को देशभक्ति, गर्व और नवीन उत्साह से सभी को ओत-प्रोत कर दिया।

लगभग नौ अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती जिलों से आए लगभग पांच सौ खिलाड़ियों, सौ से अधिक स्वयंसेवकों तथा अनेक गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए उन्होंने सीमांत चेतना मंच पूर्वोत्तर के दृष्टिकोण और निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने में संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।

सीमांत क्रीड़ा महोत्सव के महत्व पर उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल एक खेल आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय जागरण का एक आंदोलन है। यह युवाओं में भाईचारे, देशभक्ति, अनुशासन और समर्पण जैसे मूल्यों का संवर्धन करता है। उन्होंने इसे सीमावर्ती जिलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए एक स्वर्णिम अवसर बताया और उनकी भागीदारी पर गहरी संतुष्टि व्यक्त की।

महाभारत के भीष्म का उल्लेख करते हुए कहा, “राष्ट्र की सीमाएं मां के वस्त्र के समान होती हैं; उनकी रक्षा करना उसके संतानों का सर्वोपरि कर्तव्य है।” उन्होंने कहा कि सीमांत चेतना मंच पूर्वोत्तर कई वर्षों से इस आदर्श को व्यवहार में ला रहा है।

उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जन्म लेने और रहने वाले लोग वास्तव में राष्ट्र के रक्षक के रूप में ईश्वर का उपहार हैं। जिस प्रकार सुरक्षा बल आधिकारिक रूप से सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार सीमावर्ती निवासी अपने जन्म से ही स्वाभाविक प्रहरी की भूमिका निभाते हैं। उनका साहस, सतर्कता और देशभक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करते हैं। उनका जीवन वीरता, सादगी और देश के प्रति गहरे प्रेम का प्रतीक है। अनेक चुनौतियों के बावजूद वे राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा में अडिग रहते हैं और समस्त देशवासियों के लिए प्रेरणा बनते हैं।

अपने संक्षिप्त किंतु प्रभावशाली संबोधन में दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि सीमांत क्रीड़ा महोत्सव ’26 राष्ट्रीय एकता, युवा सशक्तिकरण और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास का एक प्रकाशस्तंभ बनकर उभरा है। यह केवल खेलों का उत्सव नहीं, बल्कि भारत की एकता, विविधता और अटूट आत्मबल का भव्य प्रतीक है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दत्तात्रेय होसबाले द्वारा भारत माता को पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर स्वागत समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल संजीव बोरदोलोई, आरएसएस अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य उल्लास कुलकर्णी, सीमांत चेतना मंच पूर्वोत्तर की अध्यक्षा डॉ. प्रतिमा नेओग तथा असम राज्य समिति के अध्यक्ष बाबलू कुमार रॉय उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन महासचिव डॉ. बिनिता भागवती द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण सभी जिलों के खिलाड़ियों और समर्पित स्वयंसेवकों के साथ लिया गया ग्रुप फोटो रहा, जो एकता, गर्व और राष्ट्रीय समरसता का प्रतीक बना।

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

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