कार्बन उत्सर्जन में 2035 तक 47 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य, केंद्र ने नए एनडीसी को दी मंजूरी

25 Mar 2026 17:36:53
अश्विनी वैष्णव, केन्द्रीय मंत्री


नई दिल्ली, 25 मार्च (हि.स.)। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वैश्विक पर्यावरण से जुड़ा एक प्रमुख नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने 2026 पेरिस समझौते के तहत भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह फैसला वैश्विक मंच पर भारत की कार्बन उत्सर्जन कम करने की प्रतिबद्धताओं को स्पष्ट करता है और भविष्य में ग्रीन एनर्जी तथा सतत विकास से जुड़ी कॉर्पोरेट रणनीतियों को एक नई दिशा देगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि पेरिस एग्रीमेंट के तहत भारत ने अपने जलवायु लक्ष्यों को और मजबूत करते हुए 2031–2035 अवधि के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को मंजूरी दी है।

सरकार के इस फैसले के तहत भारत अब 2035 तक 2005 के स्तर की तुलना में जी़डीपी की उत्सर्जन तीव्रता में 47 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेगा।

इसके साथ ही देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए 2035 तक 60 प्रतिशत बिजली उत्पादन क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल करने का भी लक्ष्य रखा गया है।

कार्बन उत्सर्जन को संतुलित करने के लिए वन और वृक्ष कवर के जरिए 3.5 से 4.0 अरब टन अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने की योजना है।

उल्लेखनीय है कि

इससे पहले भारत ने 2021–2030 के लिए अपना एनडीसी 2015 में प्रस्तुत किया था, जबकि कॉप-26 में देशों ने हर पांच साल में नए लक्ष्य तय करने पर सहमति जताई थी।

सरकार के अनुसार भारत पहले ही जलवायु लक्ष्यों की दिशा में तेज प्रगति कर चुका है। वर्ष 2005 से 2020 के बीच उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि 52 प्रतिशत बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर ली गई है, जो 2030 के लक्ष्य से पहले ही पूरी हो चुकी है। सरकार ने कहा है कि ये कदम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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