जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हर ग्रामीण परिवार को पेयजल के लिए मेघालय का केंद्र से समझौता

27 Mar 2026 17:18:53
नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉन्ग्राड संगमा की उपस्थिति में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुधार-आधारित एमओयू पर हस्ताक्षर करते हुए अधिकारीगण।


नई दिल्ली, 27 मार्च (हि.स.)। देश के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय ने केंद्र सरकार के साथ जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया। इससे राज्य में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति को परिणामोन्मुख और सेवा-आधारित ढांचे में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता का पेयजल नियमित रूप से उपलब्ध कराना है। ऐसा समझौता करने वाला मेघालय 12वां राज्य बन गया है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार एमओयू पर हस्ताक्षर जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राज्यमंत्री वी. सोम्माना और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की उपस्थिति में किए गए। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्रालय और मेघालय सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जलशक्ति मंत्रालय के सचिव अशोक केके मीणा ने कहा कि यह एमओयू केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सतत सेवाओं को प्राथमिकता देता है। उन्होंने ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को सशक्त बनाने पर जोर दिया ताकि वे गांव स्तर पर जल आपूर्ति प्रणाली का संचालन और प्रबंधन कर सकें।

जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि मेघालय ने जल जीवन मिशन के तहत उल्लेखनीय प्रगति की है और अब तक 83 प्रतिशत कवरेज हासिल किया है। उन्होंने राज्य सरकार से शेष कार्य शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार मिशन की समयसीमा दिसंबर 2028 तक बढ़ाई गई है और इसके लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। मिशन के तहत गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं।

मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि मेघालय, जो कभी ग्रामीण नल जल कवरेज में सबसे पीछे था, अब 83.59 प्रतिशत कवरेज हासिल कर चुका है। उन्होंने इस प्रगति का श्रेय प्रधानमंत्री और जल शक्ति मंत्रालय के मार्गदर्शन को दिया। संगमा ने कहा कि राज्य सरकार जल आपूर्ति की मात्रा, गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य ने 2019 में ही एक व्यापक जल नीति अपनाई थी और जलवायु परिषद का गठन किया था, जिसके तहत विभिन्न विभाग मिलकर जल संरक्षण और जागरूकता पर काम कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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