अब उप्र के वाराणसी में गूंजेगी सम्राट विक्रमादित्य की शौर्य गाथा

27 Mar 2026 17:06:53
सम्राट विक्रमादित्य


-3 से 5 अप्रैल तक होगा “महानाट्य” का भव्य मंचनभोपाल, 27 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश सरकार भारतीय ज्ञान, परंपरा और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी गौरवमयी अभियान विक्रमोत्सव-2026 के अंतर्गत, उत्त्तर प्रदेश की मोक्षदायिनी नगरी वाराणसी में आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक भव्य “महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य” का मंचन किया जायेगा।

जनसंपर्क अधिकारी अनुराग उइके ने शुक्रवार को बताया कि वाराणसी में होने वाली तीन दिवसीय विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के 'शकारि' और 'साहसांक' बनने की गाथा को जीवंत किया जाएगा। नाटक में दिखाया जाएगा कि कैसे एक लोक-कल्याणकारी राजा ने अपने राजकोष से धन देकर प्रजा को ऋणमुक्त किया और एक ऐसा साम्राज्य स्थापित किया जहाँ न कोई दरिद्र था और न ही कोई दुखी।

सम्राट की 'नवरत्न' परंपरा, जिसमें कालिदास, वराहमिहिर और धन्वंतरि जैसे महान विद्वान शामिल थे, उनके माध्यम से 'श्रेष्ठ भारत' के निर्माण के संकल्प को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। दिल्ली के लाल किले पर सफल मंचन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसकी सराहना के बाद, वाराणसी का यह मंचन एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

न्यायप्रियता, वीरता और सुशासन के प्रतीक है सम्राट विक्रमादित्यमुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सम्राट विक्रमादित्य केवल एक शासक नहीं, बल्कि भारतीय न्यायप्रियता, वीरता और सुशासन के जीवंत प्रतीक हैं। वाराणसी में होने वाला यह महानाट्य जन-जन को उस वैभवशाली कालखंड से परिचित कराएगा। जब सम्राट विक्रमादित्य ने आज से लगभग 2100 वर्ष पूर्व आक्रांता शकों का समूल नाश कर 'विक्रम संवत' का प्रवर्तन किया था, यह संवत विश्व की प्राचीनतम काल-गणनाओं में से एक है, जो भारतीय विज्ञान और खगोल शास्त्र की श्रेष्ठता को दर्शाता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विक्रमोत्सव की ऐतिहासिक सफलता

उल्लेखनीय है कि उज्जैन में आयोजित 'विक्रमोत्सव 2026' ने डिजिटल आउटरीच में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ की रिपोर्ट के अनुसार, 7 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच इस आयोजन की डिजिटल रीच 17.72 करोड़ से अधिक रही है। सोशल मीडिया पर #vikramutsav2026 जैसे हैशटैग्स ने वैश्विक स्तर पर ट्रेंड किया, जिससे सिद्ध होता है कि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों की ओर लौटने को आतुर है।

महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ और मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह महानाट्य वाराणसी में न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय एकता के सूत्र को और अधिक सुदृढ़ करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्पों के अनुरूप यह आयोजन 'विकसित भारत' की राह में 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण' का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

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