
नई दिल्ली, 29 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) लगातार बिकवाल (सेलर) की भूमिका में बने हुए हैं। मार्च के महीने में अभी तक विदेशी निवेशक बिकवाली कर भारतीय शेयर बाजार से 1.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर चुके हैं। अक्टूबर 2024 के बाद किसी एक महीने में विदेशी निवेशकों की ओर से की गई बिकवाली का ये अभी तक सबसे बड़ा आंकड़ा है। अक्टूबर 2024 में विदेशी निवेशकों ने एक महीने की अवधि में 94,017 करोड़ रुपये के शेयर की बिकवाली की थी।
बिकवाली का ये आंकड़ा इस महीने के खत्म होने के पहले ही पीछे छूट गया है, जबकि मार्च में अभी सोमवार 30 मार्च का कारोबारी सत्र बचा हुआ है। ऐसे में विदेशी निवेशकों की ओर से एक महीने में की गई बिकवाली का ये आंकड़ा और बढ़ सकता है। मार्च के चौथे सप्ताह के अंत तक यानी 27 मार्च तक हुई बिकवाली के आंकड़ों को मिला कर साल 2026 में विदेशी निवेशक अभी तक घरेलू शेयर बाजार से 1.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर चुके हैं।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार साल 2026 की शुरुआत से लेकर अभी तक शेयर बाजार में की गई खरीद-बिक्री को मिलाकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कुल मिला कर 1,27,157 करोड़ रुपये की निकासी की है। मार्च के महीने में 27 तारीख तक विदेशी निवेशकों ने स्टॉक मार्केट में कुल 1,13,810 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की है। इसके पहले फरवरी के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने स्टॉक मार्केट में 22,615 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी, जबकि जनवरी के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 35,962 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण मार्केट सेंटीमेंट्स में आई गिरावट की वजह से विदेशी निवेशक अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए दुनिया भर के शेयर बाजारों में बिकवाली कर रहे हैं। इसी तरह रुपये की कीमत में लगातार आ रही कमजोरी और कच्चे तेल की कीमत में उछाल की वजह से भी मार्केट सेंटीमेंट्स पर निगेटिव असर पड़ा है। रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी होने से भारत की ग्रोथ पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसलिए भी विदेशी निवेशक बिकवाली करने में लगे हुए हैं।
धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक वैश्विक आर्थिक प्रतिकूल परिस्थितियों और बढ़ी हुई जियो पॉलिटिकल अनिश्चितता के चलते बिकवाल बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी का रुख बना हुआ है। इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले पैसों (रेमिटेंस) में भी कमी आने का डर है। इसी तरह कच्चे तेल की ऊंची कीमत की वजह से भारतीय कंपनियों का मुनाफा प्रभावित होने की भी चिंता पैदा हो गई है। इन तमाम वजहों के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय बाजार में लगातार बिकवाल की भूमिका में बने हुए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक