
नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स)। आयकर विभाग ने सोमवार को कहा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के प्रावधानों के तहत आने वाली सभी बैंकिंग कंपनियां तय सीमा से अधिक ब्याज आय पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की कटौती करेंगी।
आयकर विभाग ने बैंकिंग संस्थानों के मामले में धारा 194ए के तहत ब्याज पर टीडीएस के संबंध में स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि आयकर कानून के अनुसार यदि बैंक या डाकघर जमा से प्राप्त ब्याज आय एक वित्त वर्ष में सामान्य नागरिकों के लिए 50 हजार रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक लाख रुपये से अधिक हो जाती है, तो उस पर टीडीएस काटा जाता है।
आयकर विभाग ने बताया कि नए आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 402 के तहत ‘बैंकिंग कंपनी' से तात्पर्य उन कंपनियों से है, जिन पर बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 लागू होता है। आयकर अधिनियम, 1961 के तहत ‘बैंकिंग कंपनी’ की परिभाषा में केवल वे कंपनियां ही नहीं, बल्कि उस अधिनियम की धारा 51 में उल्लिखित 'कोई भी बैंक या बैंकिंग संस्था' भी शामिल हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की वर्तमान धारा 51 के तहत आने वाले ऐसे बैंक एवं बैंकिंग संस्थान, आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 402 के तहत 'बैंकिंग कंपनी' की परिभाषा में शामिल माने जाएंगे, भले ही उनका स्पष्ट उल्लेख न हो।
आयकर विभाग ने कहा कि इस प्रकार ऐसे बैंक या बैंकिंग संस्थान धारा 393(1) में निर्धारित सीमा से कम राशि पर आयकर काटने के लिए बाध्य नहीं होंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर