दक्षिण भारत दौरे पर जाएंगे बीएचयू वैज्ञानिक, अजनाला सैनिकों के परिवार का लेंगे सैंपल

30 Mar 2026 15:47:53
संगोष्ठी में आए प्रतिभागी शिक्षक


वाराणसी, 30 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिकों की टीम जल्द ही दक्षिण भारत के दौरे पर जाएगी। वहां टीम अजनाला (पंजाब) के सैनिकों के परिवारों का डीएनए सैंपल लेंगे। यह जानकारी बीएचयू के जीन विज्ञानी प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने दी।

उन्होंने बताया कि जॉर्जिया की क्वीन केटेवन की 400 वर्ष पहले हत्या को सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अजनाला के सैनिकों के परिवार से सैंपल लेने के बाद उसका विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।

बीएचयू के मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर में चल रहे इंडक्शन प्रोग्राम में प्रतिभागी शिक्षकों ने सोमवार को विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विभाग में चल रहे विभिन्न शोध कार्यों तथा प्रयोगशालाओं को देखा।

कार्यक्रम की शुरूआत में जीन विज्ञानी प्रोफेसर चौबे ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए सुरिंदर कोच्चर द्वारा किए गए अजनाला मामले पर असाधारण कार्य की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 2014 में हुई खोदाई में कई अवशेष सामने आए। इन अवशेष की जांच के लिए एक टीम बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी मन की बात कार्यक्रम में देश के पुरातत्वविदों और जेनेटिक एक्सपर्ट्स की प्रशंसा की थी।

कार्यक्रम में डॉ. प्रज्ञा वर्मा ने प्रतिभागियों को व्यक्ति की जीवनशैली को उसके आंतरिक घड़ी के साथ व्यवस्थित करने की उपयोगी विधि समझाई। डॉ. रुद्र कुमार पांडेय ने कोविड-19 महामारी के दौरान ज्ञान लैब द्वारा किए गए व्यापक कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।

डॉ. चन्दना बसु (सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डर्स, बीएचयू) ने बताया कि फिंगरप्रिंट का निर्माण अंग विकास से जुड़े जीनों द्वारा नियंत्रित होता है, न कि केवल त्वचा की पैटर्निंग से। उन्होंने अपने 2022 में प्रकाशित विश्व-प्रसिद्ध सेल जर्नल के शोध-पत्र का हवाला देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय टीम के साथ किए गए जीनोम वाइड एसोसिएशन स्टडी में 43 फिंगरप्रिंट-संबंधित म्युटेशन की पहचान की गई। इनमें ईवीआई 1 जीन के पास स्थित वेरिएंट विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो अंगों के विकास को प्रभावित कर फिंगरप्रिंट के आकार को निर्धारित करता है। डॉ. बसु बीएचयू की एकमात्र भारतीय वैज्ञानिक थीं जिनका यह शोध सेल में प्रकाशित हुआ था।

यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर के डायरेक्टर प्रोफेसर आनंद वर्धन शर्मा ने बताया कि ट्रेनिंग कार्यक्रम 19 अप्रैल तक चलेगा। कार्यक्रम में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ रिसोर्स पर्सन के रूप में व्याख्यान दे रहे हैं, जिससे उच्च शिक्षा में गुणवत्ता वृद्धि के साथ-साथ शिक्षकों के ज्ञान एवं कौशल का विकास हो रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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