स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में बड़ी उपलब्धि, भारतीय नौसेना को तीन उन्नत पोतों की डिलीवरी

30 Mar 2026 22:09:53
जीआरएसई


कोलकाता, 30 मार्च (हि.स.)। भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को बड़ी मजबूती देते हुए भारतीय नौसेना को सोमवार को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड में तीन उन्नत स्वदेशी पोतों की डिलीवरी दी गई। जीआरएसई ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि पहला पोत ‘दुनागिरी’ (यार्ड 3023) नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का पांचवां और जीआरएसई में निर्मित दूसरा जहाज है। यह अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट नौसेना की युद्ध क्षमता, मारक क्षमता और तकनीकी दक्षता को नई ऊंचाई देता है। इसे आधुनिक हथियारों और सेंसर प्रणाली से लैस किया गया है, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल, एमएफस्टार और एमआरएसएएम जैसी प्रणालियां शामिल हैं।

दूसरा पोत ‘संशोधक’ सर्वेक्षण पोत (लार्ज) श्रेणी का चौथा और अंतिम जहाज है। यह पोत तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, नेविगेशन मार्ग निर्धारण और समुद्री डेटा संग्रह के लिए उपयोगी है। लगभग 3400 टन क्षमता वाले इस पोत में अत्याधुनिक सर्वे उपकरण लगाए गए हैं और यह 18 नॉट से अधिक की गति हासिल कर सकता है।

तीसरा पोत ‘अग्रय’ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट श्रेणी का चौथा जहाज है। यह लगभग 77 मीटर लंबा पोत है और इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और आधुनिक सोनार प्रणाली लगी है, जिससे यह समुद्र में पनडुब्बी खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है। इन तीनों पोतों का निर्माण स्वदेशी तकनीक से किया गया है, जिनमें 75 से 80 प्रतिशत तक देशी सामग्री का उपयोग हुआ है। इस परियोजना से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है। इन पोतों की डिलीवरी को ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत भारत की समुद्री शक्ति और रक्षा उत्पादन क्षमता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। ---------------

हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

Powered By Sangraha 9.0