खेल साक्षरता बढ़ाने के लिए डॉ. कनिष्क पांडेय की ‘स्पोर्ट्स अल्फाबेटिकल बुकलेट्स’ का लोकार्पण

युगवार्ता    31-Mar-2026
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नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में ‘स्पोर्ट्स अल्फाबेटिकल बुकलेट्स’ के लोकार्पण के दौरान कलराज मिश्र, डॉ. कनिष्क पांडेय, अनुराग शर्मा, सीमा द्विवेदी, गोल्ला बाबू राव, अभिषेक प्रताप शाह और अशोक ध्यानचंद सहित अन्य उपस्थित।


नई दिल्ली, 31 मार्च (हि.स.)। देश में खेलों को बढ़ावा देने, खेल साक्षरता को बढ़ावा देने और बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर खेलों से जोड़ने के लिए मेरठ स्थित आईआईएमटी महाविद्यालय के खेल विभाग के अध्यक्ष डॉ. कनिष्क पांडेय की किताब ‘स्पोर्ट्स अल्फाबेटिकल बुकलेट्स’ का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक श्रृंखला ‘ए फॉर एथलेटिक्स, बी फॉर बॉल’ जैसे सरल प्रारूप के जरिए बच्चों में खेलों की बुनियादी समझ विकसित करने पर केंद्रित है।

कार्यक्रम का आयोजन यहां इंडिया हैबिटेट सेंटर में किया गया, जिसमें पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर झांसी से सांसद अनुराग शर्मा, राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी, आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद गोल्ला बाबू राव, नेपाल के नेता अभिषेक प्रताप शाह तथा ओलंपियन अशोक ध्यानचंद सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।

कलराज मिश्र ने कहा कि देश में खेलों पर शोध आधारित कार्य बहुत कम हुआ है और डॉ. कनिष्क पांडेय ने इस दिशा में एक नई पहल की है। खेल केवल मनोरंजन या शारीरिक गतिविधि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह व्यक्ति के चरित्र निर्माण, अनुशासन और सामूहिकता की भावना को विकसित करते हैं। भारतीय संस्कृति का मूल तत्व ही सामूहिकता है और खेल इस भावना को मजबूत करते हैं। खेलों से मानसिक संतुलन बेहतर होता है, जिससे व्यक्ति में सकारात्मक सोच और आध्यात्मिकता का विकास होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पुस्तकें समाज में नई सोच पैदा करेंगी और युवाओं को सही दिशा देंगी।

झांसी से सांसद अनुराग शर्मा ने कहा कि भारत में खेलों का विकास उस स्तर पर नहीं हो पाया, जैसा अन्य देशों में देखा जाता है। क्रिकेट की लोकप्रियता अच्छी बात है, लेकिन इसके कारण अन्य खेलों को वह पहचान नहीं मिल पाई जिसकी वे हकदार हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि झांसी में कई खेल प्रतिभाएं हैं और वहां खेलों को बढ़ावा देने के लिए नए स्टेडियम का निर्माण किया गया है। संसदीय खेल पहल के तहत 1.88 लाख से अधिक बच्चों ने भाग लिया, जो इस बात का प्रमाण है कि युवाओं में खेलों के प्रति रुचि है, बस उन्हें सही मंच देने की आवश्यकता है। खेल न केवल स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं, बल्कि नशा मुक्ति जैसे सामाजिक अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

ओलंपियन अशोक ध्यानचंद ने कहा कि खेल का माहौल व्यक्ति के जीवन को दिशा देता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके परिवार में खेलों का वातावरण रहा, जिससे उन्हें प्रेरणा मिली और वे ओलंपिक तक पहुंचे। उनके पिता मेजर ध्यानचंद और चाचा रूप सिंह जैसे महान खिलाड़ियों की उपलब्धियां उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रहीं। भारत ने स्वतंत्रता से पहले भी ओलंपिक में उपलब्धियां हासिल की थीं और हॉकी ने देश में खेल संस्कृति को स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई।

इस प्रकार की पुस्तकों के माध्यम से नई पीढ़ी को खेलों से जोड़ना समय की आवश्यकता है और इसके लिए डॉ. कनिष्क पांडेय का प्रयास सराहनीय है।

राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी ने कहा कि शिक्षा और खेल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों का संतुलित विकास आवश्यक है। खेल व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और समाज के उत्थान का माध्यम बनते हैं। इस पुस्तक के माध्यम से बच्चों और युवाओं में खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और यह पहल समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होगी।

आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद गोल्ला बाबू राव ने कहा कि खेलों को लेकर इस तरह का शोध और नवाचार बहुत कम देखने को मिलता है। खेल को मौलिक अधिकारों में शामिल करने के प्रयास सराहनीय हैं और इससे समाज में खेलों के प्रति दृष्टिकोण बदलेगा। उन्होंने डॉ. कनिष्क पांडेय को आंध्र प्रदेश आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि वहां भी इस पहल को आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक युवा इससे लाभान्वित हो सकें।

नेपाल के पूर्व सांसद अभिषेक प्रताप शाह ने कहा कि भारत में खेलों को जिस तरह प्राथमिकता दी जा रही है, वह नेपाल जैसे देशों के लिए प्रेरणादायक है। इस पुस्तक का नेपाली भाषा में लोकार्पण किया गया है, जिससे नेपाल में भी खेल साक्षरता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने डॉ. कनिष्क पांडेय को नेपाल आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि इस पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की आवश्यकता है।

डॉ. कनिष्क पांडेय ने कहा कि ‘स्पोर्ट्स ए वे ऑफ लाइफ’ की शुरुआत एक पुस्तक के रूप में हुई, जो आगे चलकर एक एनजीओ के रूप में विकसित हुई। उनके शोध के अनुसार देश में खेल साक्षरता की स्थिति चिंताजनक है, जहां केवल 5.56 प्रतिशत लोग ही खेलों के प्रति जागरूक हैं, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 2.5 प्रतिशत तक सीमित है।

उन्होंने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए ‘स्पोर्ट्स लिटरेसी मिशन’ शुरू किया गया है, जिसके तहत विभिन्न राज्यों में मॉडल स्पोर्ट्स विलेज विकसित किए जा रहे हैं। यह पुस्तक 21 भाषाओं में तैयार की गई है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों तक खेलों की जानकारी पहुंचाई जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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