
नई दिल्ली, 05 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय उच्च गति रेल निगम लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने गुरुवार को मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की लागत, फंडिंग और टिकट कीमतों को लेकर फैल रही अटकलों को भ्रामक बताते हुए कहा कि परियोजना के बारे में किए जा रहे कई दावे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
कंपनी का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस की केरल इकाई ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर परियोजना की लागत में बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने अपने पोस्ट में दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत मूल अनुमान 1.1 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जबकि परियोजना अभी आधी ही पूरी हुई है और अंतिम लागत 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया था कि लागत में बढ़ोतरी से जुड़े करीब 90 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ अब भारती रेलवे को उठाना पड़ेगा, जबकि जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) इस अतिरिक्त लागत के लिए वित्तपोषण नहीं करेगा। पार्टी ने कहा कि यदि अतिरिक्त धनराशि भारत सरकार को 7–8 प्रतिशत ब्याज दर पर उधार लेकर जुटानी पड़ी तो परियोजना की लागत वसूली में एक सदी से अधिक समय लग सकता है।
कांग्रेस ने टिकट कीमतों को लेकर भी आशंका जताई थी कि मुंबई और अहमदाबाद के बीच अनुमानित 3000 रुपये का किराया बढ़कर 6000 से 7000 रुपये तक पहुंच सकता है।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए एनएचएसआरसीएल ने कहा कि परियोजना की अद्यतन लागत वैश्विक मानकों के अनुरूप है और शुरुआती लागत अनुमान लगभग एक दशक पहले परियोजना के प्रारंभिक चरण में तैयार किया गया था। संस्था के अनुसार दुनिया भर में बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में विस्तृत डिजाइन, इंजीनियरिंग, भूमि अधिग्रहण और निर्माण अनुबंध अंतिम होने के बाद लागत का आकलन अपडेट किया जाना सामान्य प्रक्रिया है।
एनएचएसआरसीएल ने कहा कि भारत में भी राजमार्ग, मेट्रो रेल और हवाई अड्डों जैसी परियोजनाओं में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और टेंडर प्रक्रिया के बाद लागत में संशोधन होता रहा है। संस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और जापान के बीच इस परियोजना के वित्तपोषण को लेकर हुआ समझौता व्यापक और स्पष्ट है तथा इसके बारे में की जा रही अटकलों का कोई आधार नहीं है। परियोजना को बेहद कम ब्याज दर और लंबी पुनर्भुगतान अवधि वाले रियायती संप्रभु ऋण के तहत समर्थन मिल रहा है।
एनएचएसआरसीएल के अनुसार यह कहना भी गलत है कि परियोजना का बोझ भारतीय रेल पर डाला जा रहा है। इसे लागू करने के लिए एनएचएसआरसीएल नामक एक समर्पित संस्था बनाई गई है, जिसकी अपनी अलग वित्तीय संरचना है और जिसमें भारत सरकार तथा संबंधित राज्य सरकारें भागीदार हैं।
संस्था ने कहा कि दुनिया भर में राष्ट्रीय परिवहन अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन केवल वित्तीय प्रतिफल से नहीं बल्कि उनके व्यापक आर्थिक लाभों के आधार पर किया जाता है। हाई स्पीड रेल कॉरिडोर समय की बचत, उत्पादकता में वृद्धि, हवाई और राजमार्ग यातायात में कमी, क्षेत्रीय आर्थिक विकास, तकनीक हस्तांतरण तथा घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने जैसे कई लाभ पैदा करते हैं।
एनएचएसआरसीएल ने कहा कि टिकट कीमतों को लेकर प्रसारित किए जा रहे अनुमान भ्रामक हैं और उनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार