

नई दिल्ली, 07 मार्च (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज नारी शक्ति राष्ट्र निर्माण की एक मजबूत शक्ति बनकर उभर रही है। महिलाओं को सशक्त बनाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री शनिवार को विज्ञान भवन में ‘भारती-नारी से नारायणी’ महिला विचारकों के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रही थीं। आठ मार्च तक चलने वाले सम्मेलन का समापन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी। सम्मेलन का आयोजन भारतीय विद्वत परिषद, राष्ट्र सेविका समिति और स्वयंसेवी संस्था शरण्या ने किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में महिला सशक्तिकरण केवल नीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का व्यापक आंदोलन बन चुका है। आज भारत की महिलाएं विज्ञान, शिक्षा, उद्यमिता, प्रशासन, खेल और रक्षा सहित हर क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं और देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि निर्णय क्षमता, साहस और मेहनत का कोई जेंडर नहीं होता। आज हर क्षेत्र में भारतीय महिलाएं पुरुषों से बेहतर काम कर रही हैं। महिलाओं ने खुद ही अपने लक्ष्य तय करना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा कि परिवार, समाज और देश की अपेक्षाएं महिलाएं अवश्य पूरी करें, लेकिन अपने मन की खुशी के लिए भी उन्हें कुछ समय निकालना चाहिए। पूरे परिवार की सेहत का ध्यान रखते हुए महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने माताओं से अपील की कि जो माहौल उन्हें नहीं मिला, वह उन्हें अपनी बेटियों को जरूर देकर उड़ने के लिए खुला आकाश देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में अपना नाम करें, यह क्षमता उनमें है। अगर वे अपने लक्ष्य स्वयं निर्धारित करें, तो नारी से नारायणी बन जाएंगी। दिल्ली में उनकी सरकार ने बेटियों को शक्ति संपन्न करने के लिए लखपति बिटिया योजना लागू की है। पहले केवल 10वीं पास करने तक ही दिल्ली की बेटियों को आर्थिक लाभ दिया जाता था लेकिन उनकी सरकार ने बेटियों के स्नातक करने पर करीब सवा लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय किया है। पहले रात्रि पाली में महिलाओं के काम करने पर रोक थी। महिलाओं के उत्थान के लिए बहुआयामी काम करने के लिए मुख्यमंत्री ने राष्ट्र सेविका समिति की जम कर तारीफ भी की।
राष्ट्र सेविका समिति की मुख्य संचालिका वी. शांता कुमारी ने इस मौके पर कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को बहुत महत्व दिया जाता है। नारी समाज को धारण करने वाली सुदृढ़ शक्ति है, इसलिए नारायणी बन सकती है। मंगलाचरण या वेदों के अध्ययन की बात हो या फिर ऑपरेशन सिंदूर, भारत की महिलाओं ने अप्रतिम शौर्य का परिचय हर क्षेत्र में दिया है।
उद्घाटन समारोह में भारतीय विद्वत परिषद की सचिव शिवानी वी ने कहा कि नारी से नारायणी पवित्र यात्रा है। लोग अक्सर नारी के सशक्तीकरण की बात करते हैं, लेकिन नारी तो अपने आप में ही ऊर्जा और शक्ति का स्रोत है। भारती- नारी से नारायणी राष्ट्रीय सम्मेलन में हर नारी सशक्तीकरण की बात करने नहीं, बल्कि अपनी शक्ति को जगा कर आत्मबोध के लिए आयी है।
समारोह में शरण्या की अध्यक्ष अंजू आहूजा, अदम्य चेतना की मैनेजिंग ट्रस्टी तेजस्विनी अनंत कुमार, राष्ट्र सेविका समिति की विजया शर्मा और चारु कालरा ने भी विचार व्यक्त किए। दो दिन के इस सम्मेलन में आठ विषयों पर गंभीर चर्चा हो रही है। महिला सांसदों, विश्वविद्यालयों की महिला कुलपतियों और महिला संतों के लिए अलग-अलग विशेष सत्र रखे गए हैं। साध्वी संगम में देशभर की महिला संत हिस्सा लेंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव