
नई दिल्ली, 08 मार्च (हि.स.)। भारत के महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई में भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि संगीत और नृत्य, भाषा और भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ते हैं और ऐसे आयोजन सांस्कृतिक पुल का काम करते हैं। ऐसे कार्यक्रम भारत और अंतरराष्ट्रीय मित्रों के बीच सांस्कृतिक समझ और मित्रता को और मजबूत करेंगे।
शंघाई में 4 मार्च को भारत के कॉन्सुलेट जनरल ने अपने सांस्कृतिक केंद्र में वसंत बैठक का आयोजन किया। भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की जीवंत परंपराओं पर आधारित इस कार्यक्रम में 1,000 से अधिक लोग शामिल हुए, जिनमें डिप्लोमैटिक कॉर्प्स के सदस्य, विशेष अतिथि, भारतीय समुदाय और चीन सहित दुनिया भर से भारत के मित्र मौजूद थे। इस आयोजन ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मेलजोल को बढ़ावा दिया। कार्यक्रम में चीनी समुदाय की बड़ी संख्या में भागीदारी रही। यह शंघाई में भारतीय कॉन्सुलेट का अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन रहा।
महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने कहा कि वसंत नई शुरुआत, रंग और खुशी का मौसम है और भारत में यह समय त्योहारों, संगीत, नृत्य और सामुदायिक आयोजनों से मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम उसी भावना को दर्शाता है। यह कलाकारों और दर्शकों को करीब लाता है और भारतीय शास्त्रीय परंपरा की गहराई को समझने का अवसर देता है। उन्होंने कुचिपुड़ी नृत्य और भारतीय वाद्य संगीत की प्रस्तुतियों को जीवंत परंपरा बताते हुए कहा कि यह सदियों के दर्शन, सौंदर्यशास्त्र और आध्यात्मिक विचारधारा को संजोए हुए हैं।
माथुर ने चैती आर्ट्स फाउंडेशन और प्रतिभाशाली कलाकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन स्थानीय समाज की कल्पना को आकर्षित करने और जन-जन के बीच संबंधों को मजबूत करने में सफल रहा। कलाकारों ने पारंपरिक बैठक शैली में आयोजित इस कार्यक्रम में कुचिपुड़ी नृत्य की अभिव्यक्तिपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। इसके बाद सारंगी और सितार वादन सहित भारतीय शास्त्रीय वाद्य संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। इन कला रूपों ने भारतीय दर्शन, सौंदर्यशास्त्र और आध्यात्मिक विचारधारा की गहराई को दर्शकों तक पहुंचाया।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर