
काठमांडू, 09 मार्च (हि.स.)। अमेरिका–ईरान युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच वहां काम कर रहे 50 हजार से अधिक नेपाली श्रमिकों ने अपनी वापसी के बारे में सरकार को आवेदन दिया है। तनाव बढ़ने के बाद सरकार ने खाड़ी देशों में कार्यरत नेपाली श्रमिकों का विवरण एकत्र करने के लिए विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया था। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदलती स्थिति पर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है।
इसके बाद कांसुलर विभाग ने ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली 3 मार्च से शुरू की, जिसमें कुल 51,405 नेपाली श्रमिकों ने अपनी जानकारी दर्ज कराई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल के अनुसार पंजीकरण में दी गई जानकारी के आधार पर श्रमिकों की सुरक्षा स्थिति का आकलन किया जा रहा है और उसी के अनुसार प्राथमिकता तय कर बचाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन दर्ज जानकारी के आधार पर हमने यह पहचान की है कि कौन नेपाली सुरक्षित है और कौन असुरक्षित। जिन्होंने खुद को असुरक्षित बताया है, उनके बारे में दूतावास के माध्यम से जानकारी ली जाएगी। यदि किसी को अत्यधिक जोखिम में पाया गया तो उसे प्राथमिकता के आधार पर निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”
प्रवक्ता के अनुसार समस्याओं में फंसे नेपाली श्रमिकों के लिए उनके नियोक्ताओं के साथ भी समन्वय किया जाएगा। सरकार ने खाड़ी क्षेत्र में रह रहे सभी नेपाली नागरिकों से अपनी स्थिति बताने के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने का अनुरोध किया है। हालांकि अब तक कितने लोगों ने खुद को सुरक्षित या असुरक्षित बताया है, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
युद्ध के कारण हवाई सेवा प्रभावित
28 फरवरी से शुरू हुए ईरान इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण काठमांडू और खाड़ी देशों के बीच हवाई सेवा लगभग 10 दिनों तक बंद रही। फिलहाल Emirates और अन्य कुछ एयरलाइनों के माध्यम से यूएई से आंशिक उड़ानें शुरू हो चुकी हैं, लेकिन दोहा–काठमांडू उड़ान अभी तक शुरू नहीं हुई है। उड़ानें बाधित होने के कारण नेपाली नागरिकों सहित सैकड़ों यात्री खाड़ी के विभिन्न शहरों में फंसे हुए हैं और कई श्रमिक अभी तक स्वदेश नहीं लौट पाए हैं।
ईरान के मिसाइल हमले से एक नेपाली नागरिक की मौत भी हो चुकी है। 18 फागुन को अबूधाबी स्थित जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ईरानी ड्रोन को निष्क्रिय करने के दौरान गोरखा जिला के निवासी 29 वर्षीय दिवस श्रेष्ठ की मौत हो गई थी। वे एक मिडिल ईस्ट कंपनी में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे।
यूएई सरकार के अनुसार इस हमले में नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान के एक-एक नागरिक की मृत्यु हुई थी।
अबूधाबी स्थित नेपाली दूतावास की प्रवक्ता रंजिता दहाल के अनुसार शुरुआत में श्रमिकों में काफी डर था, लेकिन अब स्थिति को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ भय कुछ कम हुआ है। उन्होंने बताया कि दूतावास 24 घंटे हेल्पलाइन सेवा दे रहा है और जो नेपाली आपात स्थिति में तुरंत स्वदेश लौटना चाहते हैं, उनके लिए एयरलाइंस के साथ समन्वय किया जा रहा है।
इस बीच कुवैत में ट्रांजिट के दौरान फंसे 50 नेपाली नागरिकों के लिए नेपाली दूतावास और नॉन रेजिडेंट नेपाल एसोशिएशन ने मिलकर भोजन और आवास की व्यवस्था की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास