तुर्किये ने उत्तरी साइप्रस में तैनात किए छह एफ-16 लड़ाकू विमान

09 Mar 2026 14:52:53
लड़ाकू विमान (फाइल फाेटाे)


अंकारा, 09 मार्च (हि.स.)। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष ने पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। तनाव के बीच इलाके की सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए तुर्किये ने उत्तरी साइप्रस में अपने एफ-16 लड़ाकू विमान और वायु रक्षा प्रणाली तैनात किए हैं। तुर्किये के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह कदम सुरक्षा उपायों के तहत तैयार की जा रही चरणबद्ध योजना का हिस्सा है।

सऊदी अरब की सरकारी समाचार संस्था अरब न्यूज, तुर्किये की सरकारी समाचार संस्था अनादोलु एजेंसी और विभिन्न मीडिया रिपाेर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए तुर्किये ने घोषणा की कि तनाव के बीच इलाके की सुरक्षा को मज़बूत करने की कोशिशों के तहत तुर्किए रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस (टीआरएनसी) में छह एफ-16लड़ाकू विमान और वायु रक्षा प्रणाली तैनात किए गए हैं। टीआरएनसी को केवल तुर्किये ही मान्यता देता है।

एक बयान में तुर्किये के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमारे इलाके में हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए टीआरएनसी की सुरक्षा बढ़ाने के लिए धीरे-धीरे कदम उठाने के तहत, आज से टीआरएनसी में छह लड़ाकू विमान एफ-16 फ़ाल्कन और वायु रक्षा प्रणाली तैनात किए गए हैं। मंत्रालय ने कहा कि हालात जैसे-जैसे बदलते रहेंगे, इसके आधार पर सरकार आगे और भी कदम उठाती रहेगी।

इसके अलावा, यह बयान उस घटना के कुछ दिन बाद आया है जब साइप्रस में एक ब्रिटिश सैन्य अड्डे के पास ईरान में बना ड्रोन गिरा था। साइप्रस का कहना है कि यह ड्रोन संभवतः लेबनान स्थित ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह ने दागा था, न कि सीधे ईरान ने। इस घटना के बाद कई यूरोपीय देशों ने साइप्रस को एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य संसाधन उपलब्ध कराने का वादा किया है। साइप्रस यूरोपीय संघ का सदस्य भी है और फिलहाल ब्लॉक की रोटेटिंग प्रेसीडेंसी संभाल रहा है।

दूसरी ओर, तुर्किये के रक्षा मंत्री यासर गुलर ने कहा कि तुर्किये और इजराइल के बीच सीधे सैन्य टकराव की संभावना “बेहद कम” है। संभावित गलतफहमियों को रोकने के लिए दोनों पक्षों के बीच संचार चैनल बनाए गए हैं। हालांकि, गाजा युद्ध और सीरिया में इजराइली गतिविधियों को लेकर तुर्किेये और इजराइल के बीच अक्सर तनाव बना रहता है।

तुर्किये के रक्षा मंत्री ने अमेरिका से मांग की है कि उसको एक बार फिर से एफ-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम में शामिल किया जाये। उस वक्त अमेरिका ने तुर्किये को इस कार्यक्रम से इसलिए बाहर कर दिया था क्योंकि उसने रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था। वॉशिंगटन डीसी का कहना था कि यह सिस्टम एफ-35 के स्टेल्थ तकनीक की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। --------------------

हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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