इस्लामाबाद में 15 घंटे की वार्ता में अमेरिका, ईरान अटके रहे लेबनान और होर्मुज पर, आज फिर होगी बातचीत

12 Apr 2026 06:35:53
सांकेतिक।


इस्लामाबाद, 12 अप्रैल (हि.स.)। पाकिस्तान के मध्य पूर्व में शांति स्थापना के साथ ईरान और अमेरिका-इजराइल के मध्य छिड़े युद्ध को खत्म कराने की कोशिश का क्या निष्कर्ष निकलता है, यह देखने के लिए कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है। राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार दोपहर से चली लगभग 15 घंटे की लंबी बातचीत में घुमा फिराकर लेबनान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दोनों पक्ष अटके रहे। ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के बीच वार्ता में मध्यस्थता कर रहे मेजबान पाकिस्तान के अधिकारियों ने फिलहाल इस वार्ता पर किसी भी टिप्पणी से इनकार कर दिया है। इस बीतचीत के बीच अच्छी खबर यह है कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू आखिरकार लेबनान से सीधी बातचीत को सहमत हो गए हैं।

ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी, अल जजीरा चैनल, पाकिस्तान के दुनिया न्यूज और अमेरिका के सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी और अमेरिकी वार्ताकारों के बीच लंबी बातचीत लगभग 15 घंटे बाद रविवार सुबह समाप्त हो गई। ईरानी अधिकारियों ने शनिवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर 13:00 (एक बजे) बजे पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित सेरेना होटल में बातचीत शुरू की। उन्होंने पहले पाकिस्तानी अधिकारियों से बात की और फिर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से। बातचीत का यह लंबा दौर रविवार को स्थानीय समय अनुसार सुबह 3:40 बजे तक जारी रहा। दोनों पक्षों के बीच आज भी बातचीत करने का कार्यक्रम है।

ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी पक्ष ने अनुचित मांगों को रखा। वह (ईरान) अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने पर अडिग है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पाकिस्तान के प्रस्ताव और दोनों पक्षों की सहमति से रविवार को बातचीत का एक और दौर चलेगा। कहा जा रहा है कि 1979 की क्रांति के बाद ईरानियों और अमेरिकियों के बीच यह अब तक की सबसे उच्चस्तरीय बातचीत है। इससे पहले 2015 में दोनों देशों के तत्कालीन विदेशमंत्रियों के बीच बैठक हुई थी। ताजा बैठक में अमेरिका का नेतृत्व उपराष्ट्रपति और ईरान का नेतृत्व संसद के स्पीकर कर रहे हैं।

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला जाता, तब तक बातचीत में कोई भी ठोस प्रगति कर पाना बेहद मुश्किल होगा। 15 घंटे की बातचीत के पांचवें दौर में दोनों पक्षों ने कई बार मसौदों का आदान-प्रदान किया है। अपने वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर बात की है। इस दौरान ईरान से और भी विमान इस्लामाबाद पहुंचे हैं। पाकिस्तान के सभी अधिकारियों को एक तरह का चुप्पी का आदेश है। मेजबान देश होने के नाते वह इस बातचीत पर कुछ भी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।

इस वार्ता का उद्देश्य

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए स्थायी शांति समझौते पर पहुंचना है। इस युद्ध ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को पंगु बना दिया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में यह शांति वार्ता ईरान और अमेरिका के दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा किए जाने के चार दिन बाद शनिवार को शुरू हुई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ ने उम्मीद जताई कि इस वार्ता से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर इस वार्ता के बाद शांति समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करेगा। ईरान ने वार्ता के लिए 10 सूत्री योजना रखी है। इसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी सेनाओं की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की अनुमति देने की मांगें शामिल हैं।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौनः इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामादा जेरेड कुशनर भी हैं।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौनः अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने पाकिस्तान पहुंचे ईरानी टीम का नेतृत्व ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबफ कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल के अन्य मुख्य सदस्यों में विदेशमंत्री अब्बास अराघची, वार्ताकार अली बाघेरी हैं। ईरानी मीडिया ने बताया कि इस्लामाबाद गए प्रतिनिधिमंडल में वार्ताकारों, विशेषज्ञों और सुरक्षा अधिकारियों समेत 71 लोग शामिल हैं।

मध्यस्थ पाकिस्तान में कौन-कौनः पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों को बातचीत के लिए मनाने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सैन्य प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और उप विदेशमंत्री इशाक डार की महत्वपूर्ण भूमिका है।

लेबनान से शांति समझौते को इजराइल तैयार

इस बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इजराइल लेबनान के साथ स्थायी शांति समझौता करने के लिए तैयार है। उन्होंने ईरान और उसके सहयोगियों की आलोचना भी की है। नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल का सैन्य अभियान आतंकवादी शासन के खिलाफ जारी रहेगा। नेतन्याहू ने दोहराया कि इजराइल लेबनान के साथ एक स्थायी शांति व्यवस्था चाहता है और साथ ही यह भी कहा कि ऐसे समझौते में दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी सुनिश्चित होनी चाहिए। एक वीडियो संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल लेबनान के साथ शांति समझौते के लिए तैयार है, लेकिन केवल तभी जब यह लंबे समय तक चलने वाला हो और हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को खत्म करने की शर्त पर आधारित हो। ईरान के सरकारी प्रेस टीवी के अनुसार, इस बीच, इजराइली सेना ने दावा किया कि उसकी सेनाओं ने पिछले 24 घंटों में लेबनान भर में हिजबुल्लाह के 200 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इस पर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने शनिवार को दावा किया कि लेबनान में संघर्ष-विराम अमेरिका के साथ बातचीत में हुए एक समझौते का हिस्सा था।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

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