
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (हि.स.)। अमेरिका और इजरायल तथा ईरान के बीच जारी जंग को रोकने के लिए पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता विफल हो जाने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) ने आज एक बार फिर गर्मी दिखा दी है। अंतराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर कारोबार करता हुआ नजर आ रहा है। खासकर, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ने आज इंट्रा-डे में 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर लिया। इसी तरह ब्रेंट क्रूड भी 103 डॉलर के स्तर को पार कर गया।
शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी करने का ऐलान किया है। ट्रंप के ऐलान के पहले ही ईरान ने भी हॉर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों और ऑयल टैंकर्स की आवाजाही को ठप करने की बात कही थी। इस समुद्री के रास्ते के ठप हो जाने से दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई पर काफी बुरा असर पड़ने की आशंका बन गई है। इसीलिए अंतररराष्ट्रीय बाजार में आज कच्चे तेल के कारोबार की शुरुआत ही 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के ऊपर से हुई।
ब्रेंट क्रूड ने आज लगभग आठ प्रतिशत की तेजी दिखाते हुए 103.28 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। ट्रेडिंग के दौरान ब्रेंट क्रूड उछल कर 103.40 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर तक पहुंच गया। हालांकि थोड़ी देर बाद ही इसकी कीमत घट कर 101.29 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई। भारतीय समय के मुताबिक शाम छह बजे ब्रेंट क्रूड 7.51 प्रतिशत की तेजी के साथ 102.34 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ने भी आज 8.58 प्रतिशत की उछाल के साथ 104.86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। थोड़ी ही देर में डब्ल्यूटीआई क्रूड 9.38 प्रतिशत की तेजी के साथ 105.63 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि दिन के कारोबार में डब्ल्यूटीआई क्रूड कुछ देर के लिए गिर कर 101.92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक भी आया, लेकिन थोड़ी देर बाद ही इसके भाव में तेजी आ गई। भारतीय समय के मुताबिक शाम छह बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 7.83 प्रतिशत की तेजी के साथ 104.14 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
पूरी दुनिया में होने वाली कच्चे तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज स्ट्रेट के जरिये होता है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण इसके लगभग ठप पड़ जाने से दुनिया भर में उथल-पुथल मच गई है। इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमत में भी जोरदार उछाल आ गया है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के लिए सीजफायर का ऐलान होने के बाद कच्चे तेल की कीमत में गिरावट का रुख बन गया था। लेकिन ये गिरावट टिक नहीं सकी। दोनों पक्षों के बीच पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के विफल हो जाने के बाद अब एक बार फिर कच्चे तेल की कीमत में तेजी का रुख बन गया है।
जानकारों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में दोनों पक्ष युद्ध रोकने की बात पर सहमत भी होते हैं, तब भी कच्चे तेल की कीमत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इस युद्ध के कारण ईरान और खाड़ी के देशों में ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसलिए अगर युद्ध रुक भी जाता है तो पश्चिम एशिया के देशों के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर का पहले की तरह से फुल कैपिसिटी में काम शुरू कर पाना मुश्किल है। जंग की वजह ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर का फिजिकल सिस्टम जल्दी ठीक नहीं होने वाला है। खासकर, जंग के कारण बंद हो गए तेल कुओं को फिर से शुरू करने, क्रू और जहाजों को दूसरी जगह भेजने और रिफाइनरी इन्वेंट्री को फिर से बनाने में काफी लंबा समय लगेगा।
टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत का लंबे समय तक बना रहना भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट को बढ़ा सकता है। इसके साथ ही इसकी वजह से फिस्कल डेफिसिट टारगेट भी हिट हो सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत भारतीय मुद्रा को कमजोर कर सकती है, महंगाई को बढ़ा सकती है और फॉरेन कैपिटल आउटफ्लो (विदेशी पूंजी की निकासी) को और बढ़ा सकती है। इसी तरह अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव से स्टॉक मार्केट में अनिश्चितता आ सकती है, क्योंकि सरकार को सब्सिडी, इंट्रेस्ट रेट और रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट पर पड़ने वाले असर के बारे में कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक