
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (हि.स)। देश में मोटर वाहनों की थोक बिक्री विगत वित्त वर्ष 2025-26 में सालाना आधार पर 10.4 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 2,82,65,519 इकाई रही। इस दौरान यात्री एवं वाणिज्यिक वाहन, दोपहिया एवं तिपहिया वाहन सहित सभी खंडों ने अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की है। इसकी मुख्य वजह माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती रही है।
वाहन विनिर्माताओं के संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में मोटर वाहनों की थोक बिक्री 10.4 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 2,82,65,519 इकाई रही है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू वाहनों की कुल बिक्री 2,56,09,399 इकाई रही थी। मार्च में घरेलू यात्री वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 16 फीसदी बढ़कर 4,42,460 इकाई हो गई। यात्री वाहनों की थोक बिक्री मार्च 2025 में 3,81,358 इकाई रही थी। दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री भी 19.3 प्रतिशत बढ़कर पिछले महीने 19,76,128 इकाई हो गई जो मार्च, 2025 में 16,56,939 इकाई थी। इसके अलावा तिपहिया वाहनों की थोक बिक्री 21.4 प्रतिशत बढ़कर 76,273 इकाई रही, जबकि मार्च, 2025 में यह 62,813 इकाई थी।
वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का भारतीय मोटर वाहन उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र की मांग को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर निकट अवधि में चुनौतियां खड़ी कर सकता है। चंद्रा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मोटर वाहन उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 को मजबूत स्थिति से समाप्त किया, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न घटनाक्रम कुछ जोखिम पैदा करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न हालिया अनिश्चितताओं पर करीबी नजर रखने की जरूरत है।
शैलेश चंद्रा ने कहा कि बदलती भू-राजनीतिक स्थिति का मोटर वाहन उत्पादन, कच्चे माल एवं जिंस कीमतों, ईंधन कीमतों तथा मालभाड़ा दरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ईंधन कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है और पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है, तो मांग पर इसका असर पड़ सकता है। चंद्रा ने यह भी कहा कि एलपीजी पर निर्भर कई कंपनियां अब पीएनजी अपना रही हैं और इन गैस के अधिक कुशल उपयोग के तरीके भी तलाश रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि ईंधन कीमतों में वृद्धि होती है, तो इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर