
गांधीनगर, 14 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। वह गुजरात के गांधीनगर स्थित लोकभवन में डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित “सामाजिक समरसता महोत्सव” कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।
कार्यक्रम में राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी तथा गृह मंत्री हर्ष संघवी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति मुर्मु ने डॉ. भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल भारतीय संविधान का निर्माण किया, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और आधुनिक भारत की मजबूत नींव रखी। उन्होंने भगवान बुद्ध के “भवतु सब्ब मंगलम्” सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा साहब ने समतामूलक समाज की स्थापना के लिए व्यापक जनजागरण किया।
राष्ट्रपति ने शिक्षा, सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता को राष्ट्र निर्माण के प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि “शिक्षित बनो” का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को संविधान में मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया है और विशेष रूप से वंचित तथा पिछड़े वर्गों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नैतिक शिक्षा के माध्यम से समाज में भाईचारे और समरसता को मजबूत करने पर भी बल दिया।
उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और समरस समाज का निर्माण समरस गांवों के बिना संभव नहीं है। गांवों में आज भी सामाजिक सौहार्द और पारस्परिक सहयोग की भावना देखने को मिलती है, जो भारतीय संस्कृति की पहचान है। जब गांव आत्मनिर्भर और सुविधायुक्त बनेंगे, तभी भारत वास्तविक रूप से विकसित राष्ट्र बनेगा।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति भावुक भी हुईं और अपने पिता की सीख का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति चाहे कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए, उसे हमेशा यह देखना चाहिए कि कोई जरूरतमंद पीछे न छूट जाए। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सफलता तभी सार्थक है, जब वह समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में योगदान दे। उन्होंने गुजरात के डेयरी क्षेत्र और पशुपालकों की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज विश्व में दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है, जिसमें गुजरात की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही उन्होंने ओडिशा में अपने मंत्री कार्यकाल के दौरान किए गए ‘गौ-मित्र’ जैसे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
राष्ट्रपति ने अंत में सभी से स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को अपनाकर समरस और सशक्त भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि बाबा साहब के विचार समानता, सामाजिक न्याय और अवसर की बराबरी पर आधारित हैं, जिन्हें सरकार विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सामाजिक समरसता को राष्ट्र की मजबूती का आधार बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने समाज सुधारकों के योगदान का उल्लेख करते हुए ‘अंत्योदय’ के विचार को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे