मप्र को साधना सप्ताह में अधिकतम पाठयक्रम पूरा करने राष्ट्रीय स्तर पर मिला तीसरा स्थान

18 Apr 2026 17:27:53
साधना सप्ताह में अधिकतम पाठयक्रम पूरा करने के लिए मप्र को सम्मानित किया गया


- राज्य में जनजातीय कार्य विभाग प्रथम स्थान पर, नये विषयों, एआई आधारित पाठयक्रमों में लोकसेवकों ने दिखाई विशेष रूचिभोपाल, 18 अप्रैल (हि.स.)। भारत सरकार के मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत लोक सेवकों के लिए संचालित ऑनलाइन प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के लिये चलाये गये साधना सप्ताह में मध्य प्रदेश को आईगाट पोर्टल पर अधिकतम पाठयक्रम पूरा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान मिला है। साधना सप्ताह गत दो अप्रैल से 10 अप्रैल तक चलाया गया था।

जनसंपर्क अधिकारी अवनीश सोमकुंवर ने शनिवार को बताया कि राष्ट्रव्यापी साधना सप्ताह में विभिन्न पाठयक्रमों में पंजीयन करने वाले लोक सेवकों की संख्या 9 लाख 49 हजार 215 रही। एक घण्टे के कोर्स पूरा करने वाले प्रदेश के लोक सेवकों की संख्या 3 लाख 12 हजार 662 रही। चार घंटे के कोर्स पूरा करने वाले लोक सेवकों की संख्या 2 लाख 25 हजार 700 और कम से कम एक एआई कोर्स पूरा करने वाले लोक सेवकों की संख्या 01 लाख 85 हजार 562 रही। साधना सप्ताह के दौरान कर्मयोगी उत्कर्ष बैच 855 को मिला जबकि 92,432 को एआई दक्ष बैच मिला।

उन्होंने बताया कि केन्द्रीय कार्मिक मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने नई दिल्ली में गत दिवस गरिमापूर्ण समारोह में मप्र को सम्मानित किया। आसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के महानिदेशक सचिन सिन्हा ने पुरस्कार ग्रहण किया। उन्होंने विभागों के लोक सेवकों को निरंतर मार्गदर्शन दिया और विभागों में निरंतर समन्वय बनाये रखा। अकादमी के संचालक मुजीबुर्रहमान खान ने बताया कि अकादमिक स्टाफ और विभागों के सहयोग से प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। आसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी को विभागों के लिए एआई आधारित क्षमता निर्माण कार्ययोजनाएं बनाने में उल्लेखनीय योगदान के लिये पुरस्कृत किया गया।

इसी तरह राज्य स्तर पर जनजातीय कार्य विभाग द्वारा 10 हजार से ज्यादा लोकसेवकों की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने विभाग के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होने कहा कि प्रशिक्षण एक निरंतर प्रक्रिया है। लोकहित के कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए कार्यदक्षता अनिवार्य है।

साधना सप्ताह में क्या हुआ

साधना सप्ताह का उद्देश्य शासकीय सेवकों में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से शासकीय तंत्र में सुदृढ़ता सुनिश्चित करना था। प्रशिक्षण की विभिन्न प्रणालियों को अपनाने और आईगाट कर्मयोगी पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों को पूरा करने के लिए लोक सेवकों को प्रेरित किया गया।

साधना सप्ताह का ढांचा तीन प्रमुख सूत्रों पर केंद्रित था-टेक्नोलॉजी, परंपरा और ठोस परिणाम। “साधना सप्ताह’’ के दौरान प्रत्येक अधिकारी/कर्मचारी को न्यूनतम 05 प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया था। प्रत्येक विभाग में 4 से 5 व्यक्तियों का समूह बनाया गया, जिसमें विभागाध्यक्ष, स्थापना एवं तकनीकि शाखाओं से जुड़े अधिकारी थे। संभाग, जिला, विकास खंड एवं प्रत्येक कार्यालय प्रमुख के स्तर पर समूह बनाए गये।

साधना सप्ताह अतंर्गत विभागों के शासकीय सेवकों/संविदा अधिकारियों/कर्मचारियों को उनके पदों के अनुसार कम से कम 10 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आंवटित किए गए। कम से कम तीन एआई कोर्स पूर्ण करने पर “एआई दक्ष बैज” दिया जा रहा है।

डिजिटल प्रशिक्षण में आगे

जनसंपर्क अधिकरी ने बताया कि मध्य प्रदेश सर्वाधिक डिजिटल प्रशिक्षण आईगाट पोर्टल पर कोर्स निर्मित करने वाला पहला राज्य बन गया है और सबसे अधिक लोकसेवकों को आईगाट पोर्टल पर पंजीकृत करने वाला तीसरा राज्य है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर केन्द्र सरकार द्वारा लोकसेवकों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उनको नागरिक केन्द्रित होकर कर्मयोगी के रूप में दक्षतापूर्वक अपनी भूमिका निभाने मिशन कर्मयोगी वर्ष 2020 में लागू किया गया था। यह ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त करने का ऐसा प्लेटफार्म है जिसके माध्यम से सरकारी अधिकारी-कर्मचारी कहीं भी-कभी भी-किसी भी स्थान से अपनी सुविधानुसार स्व-प्रशिक्षित हो सकते हैं। वे अपनी दक्षता और ज्ञान बढ़ाने अपने विभाग से संबंधित विषयों पर उपलब्ध पाठयक्रमों में प्रशिक्षित हो सकते हैं। इसके अलावा अपनी रूचि अनुसार अन्य विभागों के लिए बने पाठयक्रमों में भी प्रशिक्षित हो सकते हैं।

एआई आधारित क्षमता निर्माण कार्ययोजना में अग्रणी

उन्होंने बताया कि क्षमता निर्माण आयोग से मिले इनपुट को शामिल कर बनी क्षमता निर्माण नीति लागू करने में भी मध्य प्रदेश अग्रणी है। सभी विभागों में क्षमता निर्माण इकाइयाँ स्थापित हो गई हैं और प्रशिक्षण की आवश्यकता का विश्लेषण करने के बाद कैडर-वार क्षमता निर्माण कार्य योजनाएं तैयार की जा रही हैं। विभागों में क्षमता निर्माण प्रबंधकों की सेवाएं लेने का भी प्रावधान है। उन्हें क्षमता निर्माण इकाइयों द्वारा सहयोग दिया जायेगा। क्षमता निर्माण प्रबंधकों द्वारा वार्षिक क्षमता निर्माण योजनाएं तैयार की जाएंगी। विभिन्न विभागों में कार्यरत मानव संसाधन की दक्षता दर्शाने वाला एक डैशबोर्ड तैयार किया गया है, जिससे माध्यम से मुख्यमंत्री कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता की स्थिति जान सकेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

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