
नई दिल्ली, 19 अप्रैल (हि.स.)। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने 'पीएम विश्वकर्मा योजना' के तहत देशभर के 2,543 पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों के प्रभावी उपयोग के लिए सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया है।
मंत्रालय के अनुसार यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'इंडियाएआई इम्पैक्ट समिट' और 'दिल्ली घोषणापत्र' में व्यक्त की गई “सामाजिक कल्याण हेतु एआई” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में मंत्रालयों द्वारा किया गया अपनी तरह का पहला प्रयास है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम को विशेष रूप से स्थानीय भाषाओं और सरल स्वरूप में तैयार किया गया था ताकि ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारीगर इसे आसानी से समझ सकें। कार्यशालाओं के दौरान शिल्पकारों को कई प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया गया। इनमें डिजिटल ब्रांडिंग, मार्केटिंग रणनीतियां और बाजार विस्तार शामिल है।
प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों को चैटजीपीटी, इंडस और गूगल जेमिनी जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म के व्यावहारिक उपयोग के बारे में बताया गया। इसका उद्देश्य पारंपरिक शिल्पकारों की व्यावसायिक दक्षता को बढ़ाना और उनके उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करना है।
इस पहल में तेलंगाना (387) और महाराष्ट्र (295) सबसे आगे रहे, जबकि गुजरात (262), राजस्थान (251) और बिहार (250) में भी व्यापक भागीदारी देखी गई। उत्तर प्रदेश से 210 और दिल्ली से 82 कारीगरों ने इस कार्यक्रम का लाभ उठाया।
यह पहल भारतीय शिल्पकला की समृद्ध विरासत को डिजिटल रूप से सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी