देश में हर ग्रामीण घर तक नल का जल पहुंचाने के लिए केंद्र ने राज्यों के साथ बनाई संचालन व रखरखाव नीति

02 Apr 2026 19:05:53
ग्रामीण घर तक नल का जल


नई दिल्ली, 02 अप्रैल (हि.स.)। ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर देश में चल रहे जल जीवन मिशन (हर घर जल) के तहत संचालन और रखरखाव (ओ एंड एम) नीति का ढांचा तैयार किया है। इसका उद्देश्य है कि पाइप जलापूर्ति योजनाओं का दीर्घकालीन संचालन सुनिश्चित हो और ग्राम पंचायतों व गांव की समितियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जा सके।

जलशक्ति राज्यमंत्री वी सोम्माना ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि राज्यों को 19 बिंदुओं वाली ओ एंड एम नीति का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। इस प्रारूप में देश में चल रही इस योजना को ग्राम पंचायत जल एवं स्वच्छता समितियों को सौंपना, उपभोक्ता शुल्क, ऊर्जा बिलों के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान, स्थानीय लोगों को संचालन व जल गुणवत्ता निगरानी में प्रशिक्षित कर नियुक्त करना शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि अब तक 23 राज्यों ने अपनी ओ एंड एम नीति अधिसूचित की है। इनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक और तमिलनाडु ने अपनी नीति को मंत्रालय द्वारा सुझाए गए 19 बिदुओं के अनुरूप लागू किया है। ग्राम पंचायतों और पानी समितियों को योजना की योजना बनाने, क्रियान्वयन, प्रबंधन और रखरखाव का अधिकार दिया गया है। इसके लिए एनजीओ, सामुदायिक संगठन और स्वयं सहायता समूहों को भी कार्यान्वयन सहयोगी एजेंसियों के रूप में जोड़ा गया है।

स्थानीय स्तर पर संसाधनों के समन्वय के लिए वित्त आयोग अनुदान, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, सांसद/विधायक निधि, जिला खनिज विकास निधि, सीएसआर फंड और सामुदायिक योगदान का उपयोग किया जा रहा है।

गांवों में संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाने के लिए ‘नल जल मित्र कार्यक्रम’ शुरू किया गया है, जिसके तहत स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें योजनाओं के ऑपरेटर बनाया जा रहा है। ये प्रशिक्षित व्यक्ति पाइप जलापूर्ति योजनाओं की छोटी-मोटी मरम्मत और रखरखाव कर सकेंगे।

सरकार ने जल जीवन मिशन की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी है और इसे पुनर्गठित कर जेजेएम 2.0 के रूप में लागू किया जा रहा है। इसके तहत ‘सुजलाम भारत’ नामक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा बनाया गया है, जिसमें हर गांव को एक विशिष्ट आईडी दी जा रही है और जलापूर्ति प्रणाली को स्रोत से नल तक डिजिटल रूप से मैप किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पारदर्शिता और जन भागीदारी बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायत डैशबोर्ड, ‘जल सेवा अंकलन’ और ‘जल जीवन संवाद’ जैसी पहलें शुरू की गई हैं। साथ ही, ग्रामीण जल, स्वच्छता और स्वच्छता क्षेत्र में काम कर रहे सभी साझेदारों के लिए ‘रूरल वॉश पार्टनर्स फोरम’ भी बनाया गया है।

-------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

Powered By Sangraha 9.0