समुद्री क्षेत्र के विकास, कौशल निर्माण के लिए केंद्र ने दिल्ली विवि, डीएसई के साथ किया समझौता

24 Apr 2026 15:12:53
जलमार्ग मंत्रालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के साथ एमयूओ पर हस्ताक्षर करते हुए।


नई दिल्ली, 24 अप्रैल (हि.स.)। देश में समुद्री क्षेत्र के विकास, क्षमता निर्माण और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों के तहत मैरिटाइम शिक्षा, प्रशिक्षण, कौशल विकास, अनुसंधान, पाठ्यक्रम निर्माण और रोजगारोन्मुख कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि देश में इस क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सके।

दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस अवसर पर रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज के महानिदेशक प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक समेत कई शिक्षाविद, नीति विशेषज्ञ और छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम में एमओयू का आदान-प्रदान, तकनीकी सत्र, छात्रों के साथ संवाद और ‘ब्लू इकॉनमी’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई।

एमओयू के तहत मैरिटाइम क्षमता निर्माण और कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। विश्वविद्यालय स्तर पर समुद्री विषयों से जुड़े कोर और वैकल्पिक पाठ्यक्रम विकसित किए जाएंगे, प्रशिक्षण सामग्री तैयार कर विभिन्न संस्थानों के साथ साझा की जाएगी। इसके साथ ही संयुक्त शोध परियोजनाएं, सेमिनार और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे तथा प्रकाशनों और रिपोर्ट्स के माध्यम से ज्ञान का प्रसार किया जाएगा। छात्रों को इस क्षेत्र में रोजगार के लिए पेशेवर मार्गदर्शन भी दिया जाएगा और मैरिटाइम अमृतकाल विजन 2047 के तहत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सोनोवाल ने कहा कि मैरिटाइम सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। देश के कुल व्यापार का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है, इसलिए इस क्षेत्र का समग्र विकास आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि 11 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा, 12 प्रमुख और 200 से अधिक गैर-प्रमुख बंदरगाहों तथा 111 राष्ट्रीय जलमार्गों के नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। वर्ष 2025-26 में प्रमुख बंदरगाहों ने 915 मिलियन टन से अधिक कार्गो हैंडल किया, जबकि राष्ट्रीय जलमार्गों पर क्षमता 145 मिलियन टन तक पहुंच चुकी है, जिसे 2030 तक 200 मिलियन टन करने का लक्ष्य है।

आरआईएस के महानिदेशक प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा ने कहा कि इन समझौतों के माध्यम से समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों को बेहतर प्रशिक्षण और कौशल प्रदान किया जाएगा, जिससे वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। यह पहल कारीगरों और कामगारों को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

योगेश सिंह ने कहा कि देश के व्यापार में समुद्री क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए इस क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करना जरूरी है। इन समझौतों के माध्यम से विश्वविद्यालय में नए कोर्स, डिप्लोमा और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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