
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (हि.स.)। देश में जैव विविधता संरक्षण को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार ने पांच वर्षीय एक परियोजना शुरू की है। इस पहल के तहत स्थानीय समुदायों, पंचायत संस्थाओं और विभिन्न एजेंसियों को जोड़कर संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ आजीविका के अवसर भी विकसित किए जाएंगे।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा शुरू की गई ‘जैव विविधता संरक्षण प्रतिबद्धताओं को सुरक्षित करने के लिए संस्थागत क्षमता सुदृढ़ीकरण’ परियोजना वर्ष 2025 से 2030 तक चलेगी। इस परियोजना को वैश्विक पर्यावरण सुविधा और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से 4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता प्राप्त होगी।
यह परियोजना तमिलनाडु और मेघालय के दो महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्रों में लागू की जाएगी। तमिलनाडु में पश्चिमी और पूर्वी घाटों के संगम क्षेत्र स्थित सत्यमंगलम परिदृश्य जिसमें मुदुमलाई बाघ अभयारण्य और सत्यमंगलम बाघ अभयारण्य शामिल हैं। इन वन क्षेत्रों से जुड़े समुदायों की भागीदारी से जैव विविधता संरक्षण को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में शामिल किया जाएगा। वहीं, मेघालय के गारो पहाड़ियों क्षेत्र में नोकरेक जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, बलपाक्रम राष्ट्रीय उद्यान और सिजू वन्यजीव अभयारण्य के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय विकास योजनाओं में जैव विविधता को शामिल कर पंचायती राज संस्थाओं और जैव विविधता प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाना है। इसके तहत वन विभाग, राजस्व विभाग, जनप्रतिनिधियों और नागरिक समाज को साथ लाकर सामुदायिक भागीदारी आधारित संरक्षण योजनाएं तैयार की जाएंगी। इसके अलावा, परियोजना के तहत पहुंच एवं लाभ साझेदारी व्यवस्था, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व सहयोग और हरित सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से नवाचारी वित्तीय तंत्र विकसित किए जाएंगे, जिससे संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों को स्थायी आजीविका मिल सके।
परियोजना का महत्वपूर्ण पहलू ज्ञान प्रबंधन और क्षमता निर्माण भी है, जिसके तहत इन क्षेत्रों में विकसित मॉडलों और नवाचारों को देशभर में लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसमें महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातीय समुदायों की भागीदारी और सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया है।
मंत्रालय ने बताया कि यह पहल निचले स्तर से ऊपर की ओर आधारित दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें पंचायत संस्थाएं प्रमुख भूमिका निभाएंगी। यह परियोजना भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्ययोजना (2024-2030), पेरिस समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्यों और वैश्विक जैव विविधता ढांचे के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में भी सहायक होगी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर