
काठमांडू, 26 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश सारंगा सुवेदी ने कहा है कि अदालत के फैसलों के खिलाफ अक्सर 'मीडिया ट्रायल' किया जाता है। उनका कहना था कि जैसे ही अदालत का आदेश या फैसला किसी पक्ष के खिलाफ आता है, मीडिया तक पहुंच रखने वाला पक्ष मनमाने ढंग से खबरें प्रसारित करने लगता है।
‘न्यायिक कार्यवाही की प्रभावशीलता बढ़ाने में न्याय क्षेत्र समन्वय समितियों की भूमिका’ विषय पर आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अदालत ने आदेश दिया और जिस पक्ष के खिलाफ हमने फैसला किया, उसकी मीडिया तक पहुंच होती है। फिर अगले ही दिन न्यायाधीशों के नाम पर तरह-तरह की खबरें आने लगती हैं। लोग उसे पढ़ते हैं और उस पर विश्वास भी कर लेते हैं, लेकिन मैंने (न्यायाधीश ने) अपनी निष्ठा के साथ काम किया, यह किसी ने नहीं देखा, किसी ने नहीं लिखा। मीडिया में जो लिखा गया, लोगों ने वही देखा।
उन्होंने कहा कि मीडिया ट्रायल के कारण न्यायपालिका और न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आग्रह किया कि न्याय क्षेत्र संवेदनशील है, इसलिए न्यायिक कार्यों को प्रभावित करने वाले कदम नहीं उठाए जाने चाहिए। साथ ही, जनता की अंतिम आस्था के केंद्र अदालत की गरिमा बनाए रखने की भी अपील की। हजारों लोगों की भीड़ से पीछा किया गया कोई नागरिक जब न्याय मांगने के लिए अदालत के गेट के भीतर प्रवेश करे, तो उसे सुरक्षित महसूस होना चाहिए। वे हजार लोग बाहर खड़े होकर कुछ भी कहें, लेकिन न्याय वहीं मिलना चाहिए।
न्यायाधीशों पर खबर लिखते समय संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब आप हमारे बारे में खबर लिखते हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या उस संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाता है या नहीं। उन्होंने कानूनी पेशे से जुड़े लोगों से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की भी अपील की। वकीलों से उन्होंने कहा कि अगर आप 20 क्लाइंट से फीस लेते हैं, तो कम से कम एक व्यक्ति को निःशुल्क सेवा दें। इसे मंदिर में पूजा करने जैसा समझें और गरीब व असहाय लोगों को न्याय दिलाने में मदद करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास