

कोलकाता, 27 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए सोमवार शाम प्रचार थम गया। अब सभी की निगाहें 29 अप्रैल को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। दूसरे चरण का मतदान राज्य का राजनीतिक भविष्य तय करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि इसमें दक्षिण बंगाल के उस ‘कोर बेल्ट’ की सीटें शामिल हैं जिसे लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है।
दूसरे चरण में कुल 142 विधानसभा सीटों पर 1,448 उम्मीदवार मैदान में हैं। तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस ने सभी 142 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 141 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने करीब 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक, दूसरे चरण का मतदान पूर्वी बर्दवान, हावड़ा, हुगली, कोलकाता, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और नादिया में होगा। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, दूसरे चरण के लिये 1463 नामांकन प्राप्त हुए। इनमें 15 लोगों का नामांकन रद्द कर दिया गया है। दक्षिण 24 परगना के भांगड़ विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 19 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं जबकि सबसे कम पांच उम्मीदवार हुगली की गोघाट (एससी) सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस चरण में 8 जिलों के कुल 3,21,73,837 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 1,64,35,627 पुरुष तथा 1,57,37,418 महिला मतदाताओं के अलावा 792 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं।
अंतिम चरण में राजधानी कोलकाता के अलावा उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली, नदिया, और पूर्व बर्धमान जिलों में मतदान होगा। इनमें से उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिले काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन दो जिलों में विधानसभा की 64 सीटें हैं। बंगाल में ऐसा माना जाता है कि जो राजनीतिक इन दो जिलों में अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रही वह सत्ता के करीब होगी। इसके अलावा हावड़ा और हुगली पर भी सबकी नजरें होंगी क्योंकि इन दो जिलों की 34 सीटों के नतीजे नये राजनीतिक समीकरण को बनाने या बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं। एक समय वाम दलों का मजबूत गढ़ रह चुके इस क्षेत्र में विगत 10-12 सालों से तृणणूल का दबदबा रहा है। हालांकि, इस बार भाजपा तृणमूल के लिये कड़ी चुनौती पेश करती नजर आ रही है, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं।
सबसे चर्चित मुकाबला कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट पर है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं। वर्ष 2021 के चुनाव में नंदीग्राम में दोनों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था, जिसमें शुभेंदु अधिकारी ने जीत दर्ज की थी। इस बार भवानीपुर में करीब 6.79 लाख मतदाता अपने वोट से इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले का फैसला करेंगे।
जादवपुर सीट भी इस चरण की अहम सीटों में शामिल है, जहां तृणमूल कांग्रेस के देबब्रत मजूमदार के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने कोलकाता के पूर्व मेयर बिकास रंजन भट्टाचार्य को मैदान में उतारा है। इसके अलावा भाटपाड़ा, बैरकपुर, चंदननगर और उलूबेड़िया उत्तर जैसी सीटों पर भी अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समीकरण चुनाव को रोचक बना रहे हैं।
दूसरे चरण के प्रचार अभियान में मतदाता सूची, नागरिकता, सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, महिला सुरक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए हैं। खासकर नदिया और उत्तर 24 परगना जैसे सीमावर्ती जिलों में अवैध घुसपैठ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। भाजपा इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाती दिखी, जबकि तृणमूल कांग्रेस अपने विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं के आधार पर वोट मांगती रही है।
शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिये चुनाव आयोग ने व्यापक इंतजाम किए हैं। लगभग सभी मतदान केंद्रों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है और संवेदनशील व अति-संवेदनशील बूथों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। वेबकास्टिंग, सीसीटीवी निगरानी और लगातार फ्लैग मार्च के जरिए शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
दूसरे चरण में केंद्रीय बलों की कुल 2,321 कंपनियां तैनात की जाएंगी। आयोग के सूत्रों के अनुसार, सबसे अधिक उत्तरी 24 परगना जिले में कुल 507 कंपनियां तैनात किए जाएंगे। उत्तर 24 परगना के बारासात पुलिस जिले में 112 कंपनी की तैनाती की जा रही है जबकि बनगांव जिले में 62 कंपनी बल की तैनाती की जा रही है। मतदान के दिन बशीरहाट में केंद्रीय बलों की 123 कंपनियां मौजूद रहेंगी। विधाननगर में केंद्रीय बलों की 50 कंपनियां तैनात की गई हैं. बैरकपुर में 160 कंपनियां होंगी।
पहले चरण में राज्य की 152 सीटों पर मतदान हुआ था, जिसमें 92 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो एक रिकॉर्ड माना जा रहा है। इस उच्च मतदान प्रतिशत ने दूसरे चरण के महत्व को और बढ़ा दिया है।
आगामी चार मई को मतगणना के बाद यह स्पष्ट होगा कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में किस पार्टी को बहुमत मिलेगा। यदि तृणमूल कांग्रेस जीत दर्ज करती है, तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। कुल मिलाकर, 29 अप्रैल का मतदान पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। 3.21 करोड़ मतदाता यह तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता यथावत रहेगी या परिवर्तन होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय