पश्चिम एशिया संकट के बीच वस्त्र और हस्तशिल्प क्षेत्र को बड़ी राहत, सरकार ने उठाए कड़े कदम

28 Apr 2026 19:50:53
प्रतीकात्मक चित्र


नई दिल्ली, 28 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को वस्त्र और हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सहायता उपायों की घोषणा की।

दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में मंगलवार को आयोजित अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में पेट्रोलियम, विदेश, बंदरगाह और वस्त्र मंत्रालय के अधिकारियों ने उद्योग की स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी।

वस्त्र मंत्रालय की सिफारिश पर भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड (गेल) ने स्पष्ट किया कि वस्त्र एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को प्राथमिकता वाली श्रेणी में रखा गया है। उद्योग के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पिछले छह महीनों की औसत खपत के 80 प्रतिशत पर बरकरार रखी गई है। यदि आपूर्ति में कोई कमी आती है तो गेल 'स्पॉट मार्केट' से गैस खरीदकर इसे पूरा कर रहा है ताकि उत्पादन न रुके।

उद्योग को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए सरकार ने कच्चे माल की कीमतों को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। इनमें राजस्व विभाग ने एमएमएफ क्षेत्र में उपयोग होने वाले 29 प्रमुख इनपुट जैसे एमईजी, पीटीए, पीईटी चिप्स और मेथनॉल पर सीमा शुल्क हटा दिया है। मंत्रालय अब कपास, नायलॉन चिप्स, रेयॉन ग्रेड वुड पल्प और कांच के बर्तन बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों (जैसे सोडा ऐश और बोरिक एसिड) पर भी सीमा शुल्क हटाने के लिए राजस्व विभाग से चर्चा कर रहा है।

इसके अलावा डाउनस्ट्रीम उद्योगों और एमएसएमई क्षेत्र में रोजगार बचाने के लिए वस्त्र मंत्रालय ने सरकार से एक खास सिफारिश की है कि दो तरह के धागों (इलास्टोमेरिक और विस्कोस रेयॉन) पर लगने वाले एंटी-डंपिंग शुल्क (एक प्रकार का एक्स्ट्रा टैक्स) को या तो हटा दिया जाए या फिलहाल के लिए टाल दिया जाए।

मंत्रालय ने एक समर्पित निगरानी प्रकोष्ठ का गठन किया है जो साप्ताहिक आधार पर निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) और क्षेत्रीय संघों (जैसे तिरुपुर और सूरत) के साथ बैठक कर रहा है। लाल सागर संकट को देखते हुए, शिपिंग लाइनों के माध्यम से जेद्दा जैसे वैकल्पिक बंदरगाहों के उपयोग की सलाह दी गई है। निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (आरओडीटीईपी) और राज्य एवं केंद्रीय करों एवं शुल्कों की छूट (आरओएससीटीएल) जैसी योजनाओं के तहत लाभ बढ़ाने और ब्याज सब्सिडी जैसे प्रस्तावों को महानिदेशक विदेश व्यापार (डीजीएफटी) को भेज दिया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम एशिया की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखे हुए है और निर्यातकों एवं कारीगरों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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