
जयपुर, 29 अप्रैल (हि.स.)। ओडिशा के क्योंझर जिले में अपनी मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचने वाले आदिवासी युवक जीतू मुंडा की दर्दनाक स्थिति ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस घटना पर राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए जीतू मुंडा के परिवार की सहायता के लिए अपनी एक महीने की सैलरी देने की घोषणा की है।
डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि जीतू मुंडा की पीड़ा ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है।
कृषि मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जीतू मुंडा की बेबसी और पीड़ा देखकर उनका कलेजा कांप उठा। उन्होंने इसे कागजी प्रक्रियाओं के नाम पर गरीब आदिवासियों के साथ होने वाली अमानवीय प्रताड़ना करार देते हुए समाज के लिए कलंक बताया।
डॉ. मीणा ने लिखा कि जीतू मुंडा का दर्द उनका अपना दर्द है और संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़ा रहना उनका कर्तव्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी एक महीने की पूरी सैलरी जीतू मुंडा के परिवार को देंगे ताकि भविष्य में वे स्वयं को असहाय महसूस न करें।
घटना 27 अप्रैल की है, जब ओडिशा के आदिवासी युवक जीतू मुंडा अपनी मृत बहन कालरा मुंडा का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा था। उसकी बहन के बैंक खाते में जमा करीब 20 हजार रुपये निकालने के लिए बैंक कर्मचारियों ने खाताधारक की उपस्थिति की शर्त रखी थी।
अनपढ़ और बैंकिंग नियमों से अनजान जीतू ने कई बार बहन की मृत्यु की जानकारी दी, लेकिन उसे कोई स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं मिला।
हताश होकर जीतू ने अपनी बहन के शव के अवशेष कब्र से निकालकर करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंचकर कर्मचारियों के सामने पेश किए। यह दृश्य बेहद मार्मिक था और प्रशासनिक संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जीतू की बहन की मृत्यु 26 जनवरी 2026 को हुई थी। उसके पति और पुत्र, जो बैंक खाते में नॉमिनी थे, का पहले ही निधन हो चुका था।
ऐसे में निकटतम रिश्तेदार होने के नाते जीतू ही उस राशि का दावा कर सकता था। डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी से मामले की गंभीर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित