

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (हि.स)। पश्चिम एशिया में बदलती परिस्थितियों और मौजूदा संकट के बीच केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा कि देश में घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की सप्लाई 100 फीसदी सुनिश्चित की गई है। एलपीजी बुकिंग की अवधि को भी कुशलतापूर्वक मैनेज करने के प्रयास किए गए हैं। इसके साथ ही किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के पास स्टॉक की कमी नहीं है, जबकि आपूर्ति भी बिना रुकावट जारी है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि देश में घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की सप्लाई सौ फीसदी सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि बुकिंग की अवधि को भी कुशलतापूर्वक मैनेज करने के प्रयास किए गए हैं। इसके साथ ही किसी भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर के पास स्टॉक की कमी नहीं है और ऑनलाइन बुकिंग लगभग 98 फीसदी तक बढ़ गई है। वहीं, लगभग 93 फीसदी एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड' सिस्टम के माध्यम से की जा रही है।
सुजाता शर्मा ने बताया कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई लगभग 70 फीसदी तक बहाल कर दी गई है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की तीन-सदस्यीय समिति, राज्य सरकारों के समन्वय से कमर्शियल एलपीजी की निरंतर बिक्री सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस महीने लगभग 1,92,532 टन कमर्शियल एलपीजी की बिक्री हुई है, जिसमें अकेले कल ही लगभग 8,500 टन की बिक्री हुई। इसके अलावा एलपीजी वितरक पर कहीं भी स्टॉक खत्म होने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग में संयुक्त सचिव, अपर्णा एस. शर्मा ने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता मजबूत बनी हुई है और आपूर्ति जरूरत से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि खरीफ 2026 सीजन के लिए 390.54 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) की जरूरत के मुकाबले मौजूदा स्टॉक 193.38 एलएमटी है, जो लगभग 50 फीसदी है।
उन्होंने बताया कि यह बेहतर योजना, पहले से स्टॉक रखने और कुशल लॉजिस्टिक्स को दिखाता है, जिससे सभी राज्यों में आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। यूरिया की उपलब्धता 73.81 एलएमटी और डीएपी की 23.47 एलएमटी है, जबकि अन्य उर्वरक भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। शर्मा ने कहा कि अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अपर्णा एस. शर्मा ने कहा कि वैश्विक संकट के बाद घरेलू उत्पादन और आयात स्थिर बने हुए हैं, जिससे कुल उपलब्धता में लगभग 78 एलएमटी की बढ़ोतरी हुई है। इसमें 62.37 एलएमटी घरेलू उत्पादन से और 15.39 एलएमटी आयात से आया है। वहीं, वैश्विक टेंडरों के जरिए लगभग 38 एलएमटी यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है और फॉस्फेटिक तथा पोटाशिक उर्वरकों के लिए लगभग 19 एलएमटी के टेंडर जारी किए गए हैं। उर्वरकों की उपलब्धता की नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है और कुल आपूर्ति मज़बूत तथा स्थिर बनी हुई है।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय, नाविकों के कल्याण और समुद्री संचालन में कोई रुकावट न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय मिशनों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में भारतीय ध्वज वाले किसी भी जहाज से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है।
उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से कंट्रोल रूम ने 8,155 कॉल और 17,000 से ज़्यादा ईमेल संभाले हैं। इनमें पिछले 24 घंटों में आई 121 कॉल और 285 ईमेल भी शामिल हैं। मुकेश मंगल ने कहा कि मंत्रालय ने अब तक 2,857 से ज्यादा भारतीय नाविकों की सुरक्षित देश वापसी में मदद की है, जिनमें पिछले 24 घंटों में लौटे 28 नाविक भी शामिल हैं। पूरे भारत में बंदरगाहों का कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है और कहीं भी भीड़भाड़ की कोई खबर नहीं है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर